India US Relations : सांस्कृतिक विरासत की घर वापसी, अमेरिका ने भारत को लौटाईं 657 बेशकीमती प्राचीन कलाकृतियां

भारत की सांस्कृतिक जड़ों की न्यूयॉर्क से दिल्ली तक ऐतिहासिक घर वापसी! अमेरिका ने भारत को 657 ऐसी कलाकृतियां सौंपी हैं जिन्हें दशकों पहले अवैध रूप से देश से बाहर तस्करी किया गया था। इनमें छत्तीसगढ़ की दुर्लभ बुद्ध प्रतिमा और मध्य प्रदेश का नृत्य गणेश शामिल हैं। आखिर इन मूर्तियों का सफर कैसा रहा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 30, 2026

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India US Relations : भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। अमेरिका ने भारत से तस्करी कर ले जाई गई 657 दुर्लभ और प्राचीन कलाकृतियों को औपचारिक रूप से वापस कर दिया है। इन कलाकृतियों की कुल अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत लगभग 1.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 116 करोड़ रुपये) आंकी गई है। मंगलवार को न्यूयॉर्क में मैनहट्टन जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इन ऐतिहासिक वस्तुओं की वापसी की घोषणा की। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की दूत राजलक्ष्मी कदम की उपस्थिति में यह औपचारिक हस्तांतरण संपन्न हुआ, जो भारत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण रहा।

तस्करी गिरोहों पर बड़ी चोट: सुभाष कपूर और नैन्सी वीनर का नेटवर्क ध्वस्त

इन प्राचीन वस्तुओं की बरामदगी किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह सफलता विभिन्न अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोहों के खिलाफ वर्षों तक चली लंबी जांच का परिणाम है। इस जांच में कुख्यात तस्कर सुभाष कपूर और सजायाफ्ता नैन्सी वीनर से जुड़े नेटवर्क के काले कारनामों का पर्दाफाश हुआ। मैनहट्टन जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने इस अवसर पर कहा कि भारत की सांस्कृतिक संपदा को निशाना बनाने वाले गिरोहों का जाल बहुत गहरा और व्यापक है। उन्होंने अपनी टीम के समर्पित प्रयासों की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि भारत को उसकी पूरी चुराई हुई विरासत वापस दिलाने के लिए अभी और भी कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

अवलोकितेश्वर की अनमोल प्रतिमा: रायपुर के सीपुर से न्यूयॉर्क तक का सफर

लौटाई गई वस्तुओं में सबसे प्रमुख आकर्षण ‘अवलोकितेश्वर’ की कांस्य प्रतिमा है, जिसकी कीमत लगभग 20 लाख डॉलर बताई जा रही है। यह प्रतिमा न केवल कलात्मक रूप से श्रेष्ठ है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी अद्वितीय है। प्रतिमा पर अंकित शिलालेख के अनुसार, इसे वर्तमान छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के सीपुर गांव के कारीगर द्रोणादित्य ने बनाया था। यह 1939 में लक्ष्मण मंदिर के पास मिले खजाने का हिस्सा थी। 1952 तक यह रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय में सुरक्षित थी, लेकिन बाद में इसे चुराकर तस्करी के माध्यम से 1982 तक अमेरिका पहुँचा दिया गया। आखिरकार, 2025 में अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इसे एक निजी संग्रह से बरामद किया।

नृत्य करते गणेश और बुद्ध की मूर्तियाँ: आस्था और कला का संगम

वापस आई कलाकृतियों में मध्य प्रदेश के एक मंदिर से लूटी गई ‘गणेश’ की बलुआ पत्थर की प्रतिमा भी शामिल है। इसे वर्ष 2000 में सुभाष कपूर के सहयोगी रंजीत कंवर ने चुराया था और बाद में इसे न्यूयॉर्क की गैलरी मालकिन डोरिस वीनर को बेच दिया गया था। इसके अतिरिक्त, लाल बलुआ पत्थर से बनी ‘बुद्ध’ की एक भव्य प्रतिमा भी वापस आई है, जिसमें भगवान बुद्ध अभय मुद्रा में खड़े हैं। करीब 75 लाख डॉलर मूल्य वाली बुद्ध की इस प्रतिमा के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन इसकी ऐतिहासिक महत्ता अक्षुण्ण है। ‘एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट’ ने इन मूर्तियों को जब्त कर भारत की सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित किया है।

कुख्यात तस्कर सुभाष कपूर का काला चिट्ठा और प्रत्यर्पण की स्थिति

इन तस्करी कांडों का मुख्य सूत्रधार सुभाष कपूर है, जिसके खिलाफ 2012 में ही वारंट जारी किया गया था। वह चोरी की प्राचीन वस्तुओं की तस्करी की अंतरराष्ट्रीय साजिश रचने का मुख्य आरोपी है। यद्यपि भारत में उसे 2022 में दोषी ठहराया जा चुका है, लेकिन अमेरिका से उसका प्रत्यर्पण अभी लंबित है। मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय उसके पांच सह-आरोपियों को पहले ही सजा दिलवा चुका है। इन एजेंसियों की सक्रियता ने दुनिया भर के तस्करों को यह कड़ा संदेश दिया है कि किसी भी देश की विरासत की चोरी अब आसान नहीं होगी।

आंकड़ों में सफलता: 36 देशों को लौटाई गई उनकी अनमोल धरोहरें

अमेरिका की ‘एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट’ का रिकॉर्ड इस क्षेत्र में सराहनीय रहा है। जानकारी के अनुसार, यह इकाई अब तक 6,200 से अधिक सांस्कृतिक वस्तुओं को बरामद कर चुकी है, जिनकी कुल कीमत 48.5 करोड़ डॉलर से भी अधिक है। इनमें से 5,900 से अधिक वस्तुएं दुनिया के 36 विभिन्न देशों को उनकी पहचान और गौरव के रूप में वापस की जा चुकी हैं। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान ने अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्रालय और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन सतत प्रयासों से ही भारत की सांस्कृतिक आत्मा को पुनः संजोना संभव हो पाया है।

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