India Russia S-400 Deal : भारतीय आकाश की अभेद्य सुरक्षा, रूस से अतिरिक्त S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदेगा भारत

भारतीय वायुसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा होने जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत ने रूस से दो अतिरिक्त S-400 मिसाइल रेजीमेंट लेने का फैसला किया है। क्या यह सिस्टम चीन के स्टील्थ फाइटर्स को ट्रैक कर पाएगा? जानिए भारत की इस नई 'आसमानी दीवार' की 5 सबसे बड़ी खूबियां।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 27, 2026

India Russia S-400 Deal :  भारतीय रक्षा क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए रूस से S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त बैटरी खरीदने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं और भारत अपनी सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों पर निवेश कर रहा है।

2.38 लाख करोड़ रुपये का विशाल रक्षा बजट और नए हथियार

इस उच्च स्तरीय बैठक में केवल S-400 ही नहीं, बल्कि भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए कुल 2.38 लाख करोड़ रुपये के विशाल रक्षा सौदों को हरी झंडी दिखाई गई है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह धनराशि विभिन्न प्रकार के अत्याधुनिक हथियारों, लड़ाकू विमानों के कलपुर्जों और नई रक्षा प्रणालियों की खरीद पर खर्च की जाएगी। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि इन खरीद प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों (Operational Readiness) को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखना और विदेशी खतरों का डटकर मुकाबला करना है।

S-400: दुश्मन के विमानों और मिसाइलों का काल

रूस द्वारा निर्मित S-400 ‘ट्रायम्फ’ दुनिया की सबसे घातक और प्रभावी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली (LRSAM) मिसाइल प्रणाली मानी जाती है। इसकी अतिरिक्त बैटरी मिलने से भारतीय वायुसेना एक साथ कई दुश्मन विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स को 400 किलोमीटर की दूरी से ही नष्ट करने में सक्षम होगी। यह प्रणाली ‘मल्टी-लेयर’ सुरक्षा कवच प्रदान करती है, जिससे दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण शहरों और सामरिक ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। भारत पहले ही इसकी कुछ इकाइयां तैनात कर चुका है, और अब अतिरिक्त यूनिट्स मिलने से वायुसेना का सुरक्षा चक्र और भी मजबूत हो जाएगा।

परिवहन विमानों और स्ट्राइक ड्रोन्स को भी मिली मंजूरी

DAC की इस बैठक में वायुसेना के बेड़े को विविधता प्रदान करने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है। इनमें मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) की खरीद शामिल है, जो दुर्गम इलाकों में सैनिकों और भारी रसद पहुँचाने में सहायक होंगे। इसके अलावा, रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (स्ट्राइक ड्रोन्स) के अधिग्रहण को भी मंजूरी दी गई है, जो बिना किसी मानवीय जोखिम के दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की क्षमता रखते हैं। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए इन मानवरहित विमानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Su-30 बेड़े का आधुनिकीकरण और इंजन ओवरहॉल

वायुसेना के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमान Su-30 MKI के रखरखाव और परिचालन क्षमता को बनाए रखने के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया है। परिषद ने Su-30 एयरो इंजन एग्रीगेट्स के ओवरहॉल (पूर्ण मरम्मत और नवीनीकरण) के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इससे विमानों के इंजन की उम्र बढ़ेगी और उनकी कार्यकुशलता में सुधार होगा। भारत सरकार का यह कदम न केवल विदेशी खरीद पर आधारित है, बल्कि स्वदेशी तकनीकी सहायता और रखरखाव के जरिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करता है।

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