India Russia Oil Deal: रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की सख्ती, 100 फीसदी टैरिफ प्रस्ताव पर भारत की नजर

रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है। प्रस्तावित कानून में भारत समेत कई देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही गई है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि भारत इस दबाव का सामना कैसे करेगा और आगे की रणनीति क्या होगी, जानिए पूरी खबर।

रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की सख्ती

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 18, 2026

India Russia Oil Deal: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से संभावित कार्रवाई को लेकर भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह अमेरिका में प्रस्तावित उस कानून पर करीबी नजर बनाए हुए है, जिसमें रूस से तेल खरीद जारी रखने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया जा सकता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत को इस प्रस्तावित कानून की जानकारी है और सरकार इससे जुड़े सभी घटनाक्रमों पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए दुनिया के कई देशों से तेल खरीदता है और यह पूरी तरह देश के हितों और आवश्यकताओं पर आधारित फैसला होता है।

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रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर निशाना

अमेरिका में लाए जा रहे इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र और वित्तीय संस्थानों पर दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि रूस को तेल से होने वाली आय मिलती है, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन युद्ध में कर सकता है। इसी वजह से रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बनाने की योजना तैयार की जा रही है।

इस प्रस्ताव को डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल और दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की पहल से आगे बढ़ाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बिल को अमेरिका के लगभग 60 सीनेटरों का समर्थन मिल रहा है।

भारत और चीन समेत पांच देशों पर लग सकता है अतिरिक्त शुल्क

अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने कहा है कि प्रस्तावित कानून के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है जो रूस से तेल खरीदना जारी रखे हुए हैं। अमेरिका का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से मॉस्को पर दबाव बढ़ाया जा सकता है और रूस की आर्थिक क्षमता को प्रभावित किया जा सकता है।

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को बताया अहम मुद्दा

भारत लंबे समय से अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से कच्चे तेल का आयात करता रहा है। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि तेल खरीद से जुड़े फैसले भारत की ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

सरकार इस मामले में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का आकलन कर रही है और आगे की रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी।

वीजा नियमों पर भी अमेरिका से संपर्क में भारत

विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी वीजा नीतियों में बदलाव को लेकर भी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका ने विदेशी छात्रों, नागरिकों और पत्रकारों के लिए वीजा प्रक्रिया को सख्त किया है, जिससे भारतीय नागरिकों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

रणधीर जायसवाल ने कहा कि वीजा नियम और आव्रजन प्रक्रिया किसी भी देश के संप्रभु अधिकार के अंतर्गत आते हैं। हालांकि, जब भारतीय नागरिकों, छात्रों या अन्य यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो भारत सरकार इन मुद्दों को अमेरिकी अधिकारियों के सामने उठाती है।

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भारत-अमेरिका संबंधों के बीच बढ़ी नजर

रूसी तेल खरीद और वीजा नियमों जैसे मुद्दों के बीच भारत और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है। भारत का कहना है कि वह अपने नागरिकों के हितों और देश की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है।