India Pakistan War: भारत-पाक युद्ध रुकवाने का ट्रंप ने फिर लिया श्रेय, शहबाज शरीफ के ‘शुक्रिया’ का दावा

फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टल गया। ट्रंप के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने खुद उन्हें 1 करोड़ लोगों की जान बचाने के लिए शुक्रिया कहा है। क्या भारत इस दावे को स्वीकार करेगा? जानिए पूरी कहानी!

India Pakistan War

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 17, 2026

India Pakistan War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। शनिवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कारण ही पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच एक विनाशकारी परमाणु युद्ध टल गया। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत के आधिकारिक रुख के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

ट्रंप का बड़ा दावा: ‘करोड़ों लोगों की बचाई जान’

डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में दुनिया ने स्थिरता देखी है। उन्होंने विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का उदाहरण दिया। ट्रंप ने कहा, “हमने दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों को आपस में लड़ने से रोका। यदि मैं हस्तक्षेप नहीं करता, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी।” उन्होंने आगे दावा किया कि उनके इस कदम से कम से कम एक करोड़ लोगों की जान बचाई गई है, जो कूटनीति के इतिहास में एक ‘कमाल’ की बात है।

शहबाज शरीफ के ‘धन्यवाद’ का जिक्र

अपने संबोधन में ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का भी नाम लिया। ट्रंप के अनुसार, शहबाज शरीफ ने तनाव कम करने के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन कर ‘थैंक यू’ कहा था। ट्रंप ने बताया कि पाकिस्तान के नेतृत्व ने स्वीकार किया कि अमेरिकी दबाव और मध्यस्थता के बिना युद्ध को रोकना लगभग असंभव था। ट्रंप लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने वैश्विक शांति में बड़ी भूमिका निभाई है।

भारत का दोटूक जवाब: तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं

ट्रंप के इन दावों के विपरीत, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने हमेशा की तरह किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता को सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली का रुख स्पष्ट है कि पाकिस्तान के साथ तनाव कम करने का निर्णय पूरी तरह से द्विपक्षीय था। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों की सेनाओं के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने आपस में बातचीत की और जमीनी हालात को देखते हुए युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति जताई। भारत का मानना है कि इसमें किसी विदेशी शक्ति का कोई कूटनीतिक दबाव काम नहीं कर रहा था।

ऑपरेशन सिंदूर और बहावलपुर पर सटीक हमला

यह पूरा विवाद पिछले साल की उन सैन्य घटनाओं से जुड़ा है जिसने उपमहाद्वीप को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया था। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। 7 मई को भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर पीओके और पाकिस्तान के भीतर स्थित जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के अड्डों को तबाह कर दिया था। विशेष रूप से बहावलपुर और मुरीदके में आतंकी कैंपों पर किए गए प्रहार ने पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया था।

पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई और युद्धविराम की मांग

भारतीय हमले के जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों से पलटवार की कोशिश की, जिससे तनाव चरम पर पहुँच गया। इस दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस को निशाना बनाया और उनके चीनी मूल के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह भेद दिया। जब पाकिस्तान को अपनी सैन्य विफलता का अहसास हुआ, तो 10 मई को उनके डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से संपर्क कर दुश्मनी खत्म करने की गुहार लगाई। इसी के बाद सीमा पर शांति बहाल हुई, जिसे ट्रंप अब अपनी कूटनीतिक जीत बता रहे हैं।

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