Imran Masood On PM Modi: पीएम मोदी के संबोधन पर इमरान मसूद का पलटवार “महिला आरक्षण राजीव गांधी का विजन था, मोदी का नहीं

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने महिला आरक्षण को पूर्व पीएम राजीव गांधी का विजन बताया और आरोप लगाया कि मोदी सरकार परिसीमन की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेंक रही है। मसूद ने चुनाव के बीच विशेष सत्र बुलाने को जल्दबाजी और चुनावी स्टंट करार देते हुए पीएम के भाषण को 'जीरो' नंबर दिए।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 19, 2026

Imran Masood On PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 18 अप्रैल 2026 की रात को दिए गए विशेष संबोधन के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां एक ओर पीएम ने महिलाओं से माफी मांगते हुए विपक्ष को ‘नारी विरोधी’ करार दिया, वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस पर तीखा कटाक्ष किया है। मसूद ने प्रधानमंत्री के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे चुनावी लाभ लेने की कोशिश बताया और भाजपा की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए।

इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया

सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की आड़ में सीटों का गणित बदलने और परिसीमन का खेल खेल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस कानून के जरिए विपक्षी नेताओं की सीटें ‘खाना’ चाहती है। मसूद के अनुसार, सरकार सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, लेकिन जनता उनके मंसूबों को समझ चुकी है। उन्होंने पीएम द्वारा विपक्षी गठबंधन के प्रमुख दलों—सपा, कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके—पर किए गए व्यक्तिगत हमलों को हताशा का प्रतीक बताया।

सत्र की जल्दबाजी पर सवाल

महिला आरक्षण के श्रेय को लेकर इमरान मसूद ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि यह पीएम मोदी का नहीं, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का महान स्वप्न था। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस ने ही देश में महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की नींव रखी थी। मसूद ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा सरकार वास्तव में गंभीर है, तो वे मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में ही तत्काल प्रभाव से आरक्षण क्यों नहीं लागू करते? उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन को पूरी तरह से खोखला बताते हुए उसे 10 में से जीरो नंबर दिए।

चुनावी घोषणाओं पर कड़ी आपत्ति जताई

इमरान मसूद ने लोकसभा चुनाव के महत्वपूर्ण चरणों के बीच अचानक संसद का सत्र बुलाने और चुनावी घोषणाओं पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि जब इस विधेयक के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है, तो सरकार सभी दलों के साथ सामूहिक चर्चा करने के बजाय ‘जल्दबाजी’ में क्यों है? मसूद ने आरोप लगाया कि चुनाव के बीच में इस तरह का सत्र बुलाना केवल मतदाताओं को भ्रमित करने का एक प्रयास है। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी क्या आपात स्थिति थी कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही यह कदम उठाना पड़ा।

भाजपा-सपा के बीच जुबानी जंग तेज

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) को नारी विरोधी और परिवारवादी पार्टी कहकर संबोधित किया था। पीएम मोदी का कहना था कि सपा ने अपने ‘महिला विरोधी दाग’ को मिटाने का मौका खो दिया है। इस पर पलटवार करते हुए विपक्षी नेताओं ने कहा कि भाजपा का यह आरोप निराधार है। मसूद ने कहा कि पंचायतों में नेतृत्व कर रही महिलाओं को संसद तक पहुँचने से रोकने का आरोप लगाने वाली भाजपा स्वयं आरक्षण को परिसीमन के पेच में फँसाकर देरी कर रही है। विपक्ष ने एकजुट होकर कहा कि मोदी सरकार केवल नारों की सरकार है, हकीकत की नहीं।