ब्यावरा
राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर का रहने वाला बिट्टू तबाही एक बार फिर चर्चा में है। शुक्रवार को वह दिनभर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता रहा। ट्रेंड होने के बाद उसे मुख्यमंत्री ने भी शुक्रवार को मिलने बुलाया। सीएम से बिट्टू तबाही की मुलाकात के बाद ब्यावरा नगर पालिका ने शनिवार सुबह अजनार नदी को सफाई को लेकर अभियान शुरू कर दिया है।
लोगों ने कहा- AI जनरेटेड है इमेज, बाद में फोटो की शेयर
असल में सोशल मीडिया पर नदी की सफाई को लेकर उसके द्वारा डाली गई तस्वीर को किसी ने एआई क्रिएटेड लिख दिया। इसके बाद बिट्टू ने सभी को आईना दिखा दिया। उसकी मेहनत और उसके द्वारा किए गए काम के बाद की तस्वीरें बताई। इसके बाद सभी उसके काम की तारीफ क रहे हैं। उसके काम की सराहना की जा रही है। देश के साथ ही विदेशों में भी उसके वीडियो शेयर किए जा रहे हैं और खूब तारीफें वह बटोर रहा है।
बिट्टू के जज्बे को देख मुख्यमंत्री ने बुलाया
बिट्टू के जज्बे को देखकर और सोशल मीडिया पर ट्रेंड देख मुख्यमंत्री कार्यालय से भी मिलने का न्यौता मिला। शुक्रवार को बिट्टू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) से मिलने पहुंचा। देर शाम हुई मुलाकात में सीएम यादव ने बिट्टू के काम की सराहना की है। साथ ही हर संभव मदद देने की बात कही है। साथ ही कहा कि बिट्टू की मेहनत बेकार नहीं जाएगी। बिट्टू तबाही से मुलाकात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया।
सीएम-बिट्टू की मुलाकात के बाद ब्यावरा नगर पालिका ने चलाया अभियान
शुक्रवार को सीएम मोहन यादव और बिट्टू तबाही की मुलाकात के बाद शनिवार सुबह ब्यावरा नगर पालिका हरकत में आया। नगर पालिका ने बिट्टू तबाही के सफाई अभियान का समर्थन करते हुए अजनार नदी में जमा पुराने कचरे और पॉलीथीन को जेसीबी और पोकलेन मशीन के माध्यम से साफ किया। इसके अलावा मंदिर के पास अजनार नदी के घाट का भी सौंदर्यीकरण भी कराया।
राजगढ़ जिले के ब्यावरा में 21 साल के एक बीएससी छात्र ने अजनार नदी को साफ करने का ऐसा बीड़ा उठाया, जिसकी शुरुआत उसने अकेले की थी। सोशल मीडिया पर 'बिट्टू तबाही' के नाम से पहचाने जाने वाले सुरेंद्र सिंह चौधरी 26 जनवरी से नदी में जमा कचरा, पॉलिथीन और गंदगी निकालने में जुटे हैं। शुरुआत में लोग उन्हें देखकर हैरान होते थे, लेकिन उनकी लगातार मेहनत ने अब नगर पालिका को भी इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
सुरेंद्र नदी के उस हिस्से की सफाई कर रहे हैं, जहां लंबे समय से बड़ी मात्रा में कचरा जमा था। स्थानीय मंदिर के आसपास नदी में उतरकर सफाई करने के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गंदे पानी में काम करने से हाथ-पैर में संक्रमण का खतरा बना रहता है, वहीं नदी की सफाई के दौरान कई बार सांप भी सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद सुरेंद्र ने सफाई का काम नहीं छोड़ा।
सांप मिले, संक्रमण हुआ, फिर भी नहीं रुके
बिना किसी जरूरी उपकरण के नदी की सफाई आसान नहीं थी. काम के दौरान उन्हें हाथ-पैर में संक्रमण जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और सांपों से भी सामना हुआ. इसके बावजूद उन्होंने सफाई नहीं छोड़ी. उनकी लगातार मेहनत देखकर ब्यावरा नगर पालिका भी आगे आई. अब जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से नदी में जमा पुराना कचरा, पॉलीथिन और मलबा हटाया जा रहा है।
नगर पालिका के सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम के मुताबिक, नदी में पांच बड़े नालों का पानी गिरता है, जो कि गंदगी और बदबू का कारण है. इसे रोकने के लिए करीब 14.77 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
सुरेंद्र की कहानी उस सोच की कहानी है जिसमें एक इंसान ने शुरुआत की और धीरे-धीरे लोग उसके साथ जुड़ते चले गए. एक फावड़े से शुरू हुई मुहिम ने पूरे शहर को बता दिया कि बदलाव के लिए हमेशा भीड़ का इंतजार जरूरी नहीं।
जिस काम की शुरुआत सुरेंद्र ने अकेले फावड़े के साथ की थी, उसने लोगों और नगर पालिका को सात आने पर मजबूर कर दिया. फिलहाल नदी के पूरी तरह साफ होने में वक्त लगेगा, लेकिन ‘बिट्टू तबाही’ की मुहीम ने साबित कर दिया कि बड़े बदलाव के लिए सिर्फ एक छोटी पहल की जरूरत होती है।
अकेले शुरू की मुहिम
सुरेंद्र का कहना है कि अजनार नदी उनके शहर की पहचान का हिस्सा है लेकिन लगातार कचरा डाले जाने से इसकी हालत खराब होती जा रही थी। उन्होंने किसी संस्था या अभियान का इंतजार करने के बजाय खुद नदी में उतरकर सफाई शुरू करने का फैसला किया। 26 जनवरी से शुरू हुई उनकी यह मुहिम लगातार जारी है।
सुरेंद्र की मेहनत का असर दिखाई देने लगा तो नगर पालिका भी आगे आई। अब पुराने समय से जमा कचरे और पॉलिथीन को हटाने के लिए नगर पालिका की ओर से जेसीबी और पोकलेन मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। मशीनों की मदद से नदी और उसके आसपास जमा भारी मात्रा में कचरे को हटाया जा रहा है।










