Ikkis Review: धरम जी हमेशा से दर्शकों के दिलों में एक अलग जगह रखते हैं। चाहे आप उनसे मिले हों या नहीं, उनकी फिल्मों और हाल के वर्षों में उनके वीडियोज ने सबके साथ एक भावनात्मक रिश्ता बना दिया है। यही जुड़ाव उनकी आखिरी फिल्म इक्कीस में और गहराई से महसूस होता है। फिल्म देखते समय उनका हर सीन आपको भावुक कर देता है।
सबसे अलग फिल्म

मैडॉक फिल्म्स के मालिक दिनेश विजन ने कहा था कि यह उनकी सबसे अलग फिल्म है और वास्तव में ऐसा ही है। निर्देशक श्रीराम राघवन ने भी अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर इसे बनाया है। जयदीप अहलावत और अन्य कलाकारों के लिए भी यह एक अलग अनुभव है। यह फिल्म किसी साधारण वॉर मूवी जैसी नहीं है, बल्कि इसे सबसे सेंसिबल वॉर फिल्म कहा जा सकता है।
कहानी: अरुण खेत्रपाल का शौर्य
फिल्म की कहानी सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल पर आधारित है, जिन्होंने 1971 की भारत-पाक युद्ध में अद्भुत साहस दिखाया था। वे परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले सबसे युवा आर्मी ऑफिसर रहे। युद्ध के दौरान उनके टैंक में आग लग गई थी और उन्हें टैंक छोड़ने का आदेश मिला, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। उनकी यह वीरता और बलिदान फिल्म का मुख्य आधार है।
फिल्म का अंदाज
इक्कीस में युद्ध फिल्मों की तरह ऊंची आवाज वाले संवाद नहीं हैं। इसमें “दूध मांगोगे तो खीर देंगे, कश्मीर मांगोगे तो चीर देंगे” जैसे डायलॉग नहीं हैं, बल्कि भावनाओं को सादगी से दिखाया गया है। फिल्म को अरुण खेत्रपाल के 80 वर्षीय पिता के नजरिए से प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि फिल्म का टोन शांत और भावुक है। टैंक के दृश्य बेहद वास्तविक लगते हैं और वीएफएक्स का कम इस्तेमाल किया गया है।
धरम जी का इमोशन
धरम जी को पर्दे पर देखना अपने आप में एक अलग अनुभव है। उनका हर सीन दर्शकों को भावुक कर देता है। असरानी के साथ उनका एक दृश्य खास है, जिसे आखिरी बार पर्दे पर देखना एक अनोखा अहसास है। दीपक डोबरियाल पाकिस्तानी सैनिक बने हैं और एक सीन में जब वे धरम जी पर चिल्लाते हैं, तो धरम जी उन्हें गले लगाते हैं। यह दृश्य दर्शकों को गहराई से छूता है।
अभिनय

धरम जी इस फिल्म की आत्मा हैं। उन्होंने अपने किरदार को जिस संवेदनशीलता और प्यार से निभाया है, वह उनके अभिनय की ऊंचाई को दर्शाता है। अगस्त्य नंदा ने अरुण खेत्रपाल के किरदार में शानदार काम किया है। चाहे कॉलेज के दृश्य हों, युद्ध के पल हों या रोमांस, उन्होंने हर भाव को बखूबी निभाया है। जयदीप अहलावत ने पाकिस्तानी आर्मी ऑफिसर के किरदार में अपनी बेहतरीन एक्टिंग का परिचय दिया है। सिकंदर खेर और विवान शाह ने भी अपने किरदारों को मजबूती से निभाया है।
लेखन और निर्देशन
अरिजीत बिस्वास, श्रीराम राघवन और पूजा लाढा सूर्ती ने फिल्म की कहानी लिखी है। श्रीराम राघवन ने इसे निर्देशित किया है। लेखन और निर्देशन दोनों ही स्तर पर फिल्म मजबूत है। राघवन ने अपने सामान्य अंदाज से हटकर इस फिल्म को बनाया है और यह प्रयोग सफल रहा है।










