IAS Abhishek Prakash: सिस्टम में रहकर सिस्टम का कैसे गला घोंटा जाता है आज की इस कहानी में हम आपको बताएंगे. कहानी एक ऐसे अपराध की जिसमें अपराधी ही एक IAS निकला. आप सोच रहे होंगे कि क्या, ये कैसे हो सकता है… लेकिन सच यही है.प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक दो मजबूत शासक और दोनों ने ही कभी भ्रष्टाचार को पनपने नहीं दिया लेकिन कहानी में थोड़ा ट्विस्ट है. एक अधिकारी ने इन दोनों के ही आदर्शों और उसूलों को धता बताते हुए उनकी धज्जियां उड़ा दी. आखिर कौन है ये IAS जिसने पीएम मोदी और सीएम योगी को खुला चैलेंज दे दिया.
IAS अभिषेक प्रकाश का काला कारनामा उजागर

बताते चले कि, कहानी उसकी जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट सोलर पैनल से प्रदेश को लैस करने की योजना में पलीता लगा दिया.नाम है अभिषेक प्रकाश साल 2006 बैच के IAS अधिकारी है. उनका जन्म 21 दिसंबर 1982 में बिहार में हुआ था. बिहार के रहने वाले अभिषेक प्रकाश ने आईआईटी रुड़की से बीटेक की पढ़ाई की. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2005 पास करके आईएएस बने अभिषेक प्रकाश की ऑल इंडिया आठवीं रैंक थी.
लखनऊ के डीएम और यूपी इन्वेस्ट के सीईओ रहे
यूपी सरकार में स्पेशल सेक्रेटरी से अभिषेक प्रकाश ने ब्यूरोक्रेट्स की जिंदगी में अपनी शुरूआत की.उसके बाद वो कई जिलों में डीएम के पद पर भी रहे जिनमें लखीमपुरी खीरी, बरेली, अलीगढ़, हमीरपुर और आखिर में लखनऊ. इन अहम जिलों में इन्होंने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी भी संभाली.अभिषेक प्रकाश राजधानी लखनऊ में 31 अक्टूबर 2019 से 7 जून 2022 तक जिलाधिकारी रह चुके है. 23 अक्टूबर 2020 से 25 जुलाई 2021 तक लखनऊ डीएम के साथ ही एलडीए वीसी की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.अभिषेक प्रकाश ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली है. वर्तमान में आईएएस अभिषेक प्रकाश मौजूदा समय में औद्योगिक विकास विभाग के सचिव और यूपी इन्वेस्ट के सीईओ हैं.
उद्योगपति की शिकायत से काले कारनामों का खुलासा
अब जानते हैं कि आखिर अचानक इस वक्त नौकरशाही में इस व्यक्ति का नाम क्यों चर्चा में आया.एक उद्योगपति जिसकी शिकायत ने एक वाइट कॉलर अधिकारी के काले कारनामों को उजागर कर दिया. विश्वजीत दत्ता… ये वही नाम है जिसने IAS अभिषेक प्रकाश की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की. उन्होंने इन्वेस्ट UP में भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव का दरवाजा खटखटाया था. दत्ता ने आरोप लगाया कि वो उत्तर प्रदेश में सोलर का एक बड़ा प्लांट्स लगाना चाहते थे, जिसको लेकर इनवेस्ट UP के CEO अभिषेक प्रकाश से उन्होंने संपर्क किया.

उनसे सौर ऊर्जा के कलपुर्जे बनाने का संयंत्र स्थापित करने के लिए इनवेस्टर UP में ऑनलाइन आवेदन करने के लिए कहा गया. आवेदन करने के बाद उनके आवेदन को स्वीकृति प्रदान की गई. प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़े वरिष्ठ IAS अधिकारी ने विश्वजीत दत्ता को गोमती नगर लखनऊ निवासी निकान्त जैन नाम के शख्स से संपर्क करने को कहा गया. बिचौलिया निकान्त जैन ने विश्वजीत दत्ता के प्रोजेक्ट को फाइनल अप्रूवल देने की एवज में पांच फीसदी कमीशन की मांग की, जिस पर दत्ता ने कमीशन देने से मना किया तो उसकी फाइल को लटकाया गया और लंबे अरसे से उस प्रोजेक्ट को अप्रूवल नहीं मिला.
अभिषेक प्रकाश पर रिश्वत मामले में कार्रवाई
इसके बाद इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव कार्यालय में शिकायत की गई. शिकायत के बाद इस पूरे मामले में इन्वेस्ट UP के CEO अभिषेक प्रकाश समय जैन की भूमिका को लेकर इंक्वायरी कराई गई और मामला चूंकि एक IAS के भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ था. लिहाजा STF का भी इस्तेमाल किया गया. जांच में उद्यमी विश्वजीत दत्ता के आरोप सही पाए गए, जिसके बाद इस पूरे मामले में FIR दर्ज कराई गई. निकान्त जैन को गिरफ्तार किया गया और मुख्यमंत्री की सहमति के बाद इनवेस्ट UP के CEO अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया. यह पहली बार नहीं है जब IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश विवादों में आए हों…
इससे पहले भी वो जब-जब, जहां जहां, जिन जिन पदों पर रहे वहां पर वो विवादों में रहे. भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे लेकिन अब तक वह बचते रहे लेकिन इस बार उद्यमी से रिश्वत मांगने के मामले में अभिषेक प्रकाश बुरी तरह से फंस गए और उनके खिलाफ मुख्यमंत्री ने निलंबन की कार्रवाई की है. इससे पहले भी कई ऐसे वाक्या आए जब उनके भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए.
अभिषेक प्रकाश के खिलाफ संपत्ति और भ्रष्टाचार की जांच तेज
IAS अभिषेक प्रकाश ने हमेशा बड़ा हाथ मारा.इंवेस्टर योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने के एवज में रिश्वत की रकम हो या फिर डिफेंस कॉरीडोर के नाम पर अधिग्रहित की गई जमीन पर भ्रष्टाचार इन जनाब ने हमेशा बड़ा हाथ मारा.भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना डिफेंस कॉरिडोर रक्षा उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना था. लखनऊ के सरोजनी नगर तहसील के भटगांव क्षेत्र में जमीन का अधिग्रहण इसी परियोजना का हिस्सा था. अधिग्रहण और मुआवजे में घोटाले का आरोप लगने पर जांच हुई.

इसमें पता चला कि 20 करोड़ रुपया का मुआवजा अधिकारियों ने अवैध तरीके से हासिल किया था. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह मुआवजा उन किसानों और जमीन मालिकों को दिया जाना था, जिनकी भूमि अधिग्रहित की गई, लेकिन इसकी जगह अफसरों ने गड़बड़ी कर ली. खुद मुआवजे की रकम उठा लिया.IAS अभिषेक प्रकाश के निलंबन के बाद अब उनके उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जिलों अलग अलग पदों पर रहते हुए तमाम फैसलों की समीक्षा करने की भी बात की जा रही है. इस बीच आरोप ये भी है कि अभिषेक प्रकाश ने भ्रष्टाचार करके अकूत संपत्ति इकट्ठा की है, जिसमें आलीशान घर फ़ार्महाउस और कई बिजनेस करने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद साक्ष्य जुटाने की कोशिश की जा रही है.
बिचौलियों के खिलाफ सख्त जांच
इन्वेस्ट UP प्रोजेक्ट में घपले और घोटाले के आरोपों के बाद भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों के करीबियों की धर पकड़ शुरू कर दी गई है. इस पूरे मामले में FIR दर्ज करके बिचौलिए निकान्त जैन को गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि बिचौलिया लकी जाफरी की भूमिका को भी जानने की कोशिश की जा रही है. ये दोनों नाम उत्तर प्रदेश की नौकरशाही के करीबी लोगों के तौर पर दिए जाते हैं. मोटी रकम वसूलने के साथ ही किसी भी काम को पूरा कराने का माद्दा रखते हैं. लिहाजा अब इस प्रकरण सामने आने के बाद इसकी भी जांच पड़ताल की जा रही है. निकान्त जैन IAS अधिकारियों के लिए लाइजनिंग करता था निवेशकों से डील करता था.

लकी जाफरी के बारे में आरोप है कि वो इस सिंडिकेट का पूरी तरह से हिस्सा रहा है. इससे पहले भी फ़ार्मा कॉलेज में छात्रवृति के 100 करोड़ के घोटाले में शामिल रहने के आरोप लगे थे जिसकी जांच ED कर रही है. मुख्यमंत्री के आदेश पर अभिषेक प्रकाश निकान्त जैन और लकी जाफरी तीनों की पूरी जांच में STF को भी शामिल कर लिया गया है. निकान्त जैन लखनऊ के सबसे पॉश कॉलोनी गोमती नगर में 3200 स्क्वायर फुट में बने आलीशान कोठी में रहता है और अक्सर इसके घर पर बड़े बड़े अधिकारियों की गाड़ियों के आवागमन की भी जानकारी मिल रही है.