Hydrogen Train: भारत ने रेलवे क्षेत्र में एक और जरूरी उपलब्धि हासिल की है। देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को संचालन के लिए हरी झंडी दे दी गई है। यह पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने और डीजल पर निभर्रता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। रेल मंत्रालय ने इस नई तकनीकि आधारित ट्रेन के संचालन मंजूरी दी है, जो भविष्य में रेलवे के हरित ऊर्जा परिवर्तिन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
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किस रूट पर चलेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन?
यह 10 कोच वाली डीजल मल्टीपल यूनिट (DMU) ट्रेन सबसे पहले हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलाई जाएगी। इस रूट की कुल दूरी लगभग 75 किलोमीटर है। इस ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। शुरुआती चरण में इसका संचालन सीमित रूट पर किया जाएगा, जिसके बाद प्रदर्शन के आधार पर विस्तार पर विचार हो सकता है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित ट्रेन
यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक इंजन की बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर काम करेगी। इसमें हाइड्रोजन गैस के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जाएगी, जिससे ट्रेन संचालित होगी। इस प्रणाली की कुल विद्युत क्षमता लगभग 1,200 किलोवाट बताई गई है। यह ट्रेन “डिस्ट्रिब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (DPRS)” तकनीक पर आधारित है, जिसमें पावर किसी एक इंजन में केंद्रित न होकर पूरी ट्रेन में वितरित रहती है। इस तकनीक से ट्रेन की ऊर्जा दक्षता बढ़ती है और संचालन अधिक स्थिर होता है।
सुरक्षा और तकनीकी मंजूरी की प्रक्रिया
इस परियोजना को शुरू करने से पहले कई तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण पूरे किए गए हैं। इसे Research Designs and Standards Organisation (RDSO) से तकनीकी मंजूरी प्राप्त हुई है। इसके साथ ही रेल सुरक्षा आयुक्त (CCRS) द्वारा भी सभी सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया गया है, जिसके बाद अंतिम अनुमति प्रदान की गई। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि ट्रेन का संचालन तुरंत शुरू हो जाएगा। इसके लिए अभी कई अन्य प्रक्रियाएं और सत्यापन चरण पूरे किए जाने बाकी हैं।
रखरखाव और मानकों का पालन जरूरी
उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक को भेजे गए स्वीकृति पत्र में यह निर्देश दिया गया है कि RDSO द्वारा निर्धारित अंतिम गति प्रमाण पत्र और रखरखाव मानकों का पालन किया जाए।साथ ही CCRS द्वारा निर्धारित सभी सुरक्षा दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा, ताकि संचालन के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी या सुरक्षा समस्या न हो।
पर्यावरण के लिए बड़ा बदलाव
हाइड्रोजन ट्रेन को भारत में ग्रीन ट्रांसपोर्टेशन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल भविष्य में अन्य रूटों पर भी लागू की जा सकती है, जिससे भारतीय रेलवे को अधिक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकेगा।
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