Humayun Kabir Sting Video : हुमायूं कबीर स्टिंग वीडियो विवाद, कलकत्ता हाई कोर्ट में जांच की मांग और राजनीतिक बवाल

पश्चिम बंगाल में पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर का एक कथित स्टिंग वीडियो वायरल होने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट में निष्पक्ष जांच की याचिका दायर की गई है। टीएमसी का दावा है कि कबीर ने बीजेपी से ₹1000 करोड़ लिए हैं, जबकि कबीर इसे एआई-निर्मित 'डीपफेक' बता रहे हैं। क्या यह वीडियो बंगाल का अगला चुनावी रुख मोड़ेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 17, 2026

Humayun Kabir Sting Video : पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के संस्थापक हुमायूं कबीर का एक कथित स्टिंग वीडियो वायरल होने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। हुमायूं कबीर ने खुद इस वीडियो की प्रामाणिकता की जांच के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में याचिका दायर करते हुए कबीर ने दावा किया कि यह वीडियो उन्हें बदनाम करने की एक गहरी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। अदालत इस मामले की सुनवाई 22 अप्रैल को कर सकती है।

बीजेपी नेताओं और दिल्ली से संपर्क का सनसनीखेज दावा

9 अप्रैल को सार्वजनिक हुए इस स्टिंग वीडियो में हुमायूं कबीर को एक कथित भाजपा नेता से बातचीत करते हुए सुना जा सकता है। वीडियो में कबीर को यह कहते सुना गया कि उनका एकमात्र लक्ष्य किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से हटाना है। उन्होंने दावा किया कि वे भाजपा के कद्दावर नेता शुवेंदु अधिकारी के नियमित संपर्क में हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के निर्देशों पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी चर्चा कर रहे हैं। वीडियो के अनुसार, उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से भी इस संबंध में बात की है।

मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण और ‘गुप्त डील’ का खुलासा

वीडियो में हुमायूं कबीर एक रणनीतिक सौदेबाजी का जिक्र करते हुए सुनाई दे रहे हैं। उनके अनुसार, शुवेंदु अधिकारी ने माना है कि भाजपा अपने दम पर 100-120 से अधिक सीटें नहीं जीत पाएगी। कबीर ने कथित तौर पर कहा, “अगर मैं मुस्लिम वोटों को ममता बनर्जी से अलग करने में सफल रहा, तो हिंदू मतदाता अपने आप भाजपा की ओर झुक जाएंगे।” उनका तर्क था कि मुस्लिम वोट बैंक के खिसकने से ही भाजपा की सत्ता में वापसी संभव है। इस बातचीत से यह संकेत मिलता है कि हुमायूं कबीर की पार्टी भाजपा के लिए एक ‘वोट-कटवा’ की भूमिका निभाने की तैयारी कर रही थी।

डिप्टी सीएम पद की लालसा और करोड़ों की फंडिंग का जिक्र

सबसे चौंकाने वाला खुलासा सीटों के गणित और फंडिंग को लेकर हुआ। वीडियो में कबीर दावा कर रहे हैं कि उन्हें 70-80 मुस्लिम बहुल सीटों पर जीत मिलने का भरोसा है। उन्होंने कहा कि मोहन यादव और शुवेंदु अधिकारी ने उनसे वादा किया है कि यदि वे ऐसा कर पाते हैं, तो उन्हें सीधे उप-मुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाया जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या इतनी सीटें जीतना मुमकिन है, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा, “मैंने मुसलमानों को बेवकूफ बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए मुझे प्रति विधानसभा क्षेत्र 3-4 करोड़ रुपये और कुल मिलाकर हजारों करोड़ रुपये की जरूरत होगी।”

बाबरी मुद्दा और मतदाताओं की भावनाओं से खिलवाड़

वीडियो के एक अन्य हिस्से में कबीर बाबरी मस्जिद मुद्दे का जिक्र करते हुए कहते हैं कि इस मुद्दे को उठाने के बाद जनभावनाएं उनके पक्ष में मुड़ी हैं, जिससे उन्हें 80-90 सीटें मिल सकती हैं। पूरा वीडियो देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी हर चुनावी गतिविधि भाजपा के इशारे पर संचालित हो रही है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री का ‘AI’ वाला तर्क और भविष्य की जांच

हाल ही में बंगाल के चुनावी दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया एक ‘डीपफेक’ हो सकता है। अब जब हुमायूं कबीर खुद इसकी जांच की मांग करते हुए हाई कोर्ट पहुंचे हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि फॉरेंसिक जांच में क्या निकलकर आता है। 22 अप्रैल को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या वाकई यह वीडियो विपक्षी एकता को तोड़ने की भाजपा की कोई गुप्त रणनीति थी या फिर यह महज एक चुनावी साजिश है।

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