होलिका दहन और होली के रंग: विंध्य में चार मार्च को उठेगा खुशियों का गुलाल

मैहर  विंध्य क्षेत्र में इस वर्ष रंगों का पर्व होली परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, अलग तिथि पर मनाया जाएगा। मैहर, सतना सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में 2 मार्च की रात होलिका दहन किया जाएगा, जबकि रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी। सूतक (शुद्धक) काल लगने के कारण इस बार 3 मार्च को रंग खेलने से परहेज किया जाएगा और तीसरे दिन होली मनाई जाएगी।  2 मार्च की रात होगा होलिका दहन धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार 2 मार्च को रात्रि लगभग 11 बजे से होलिका दहन का शुभ मुहूर्त प्रारंभ होगा। यह मुहूर्त सुबह तक रहेगा, जिसके

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Published On :

फ़रवरी 27, 2026

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मैहर 

विंध्य क्षेत्र में इस वर्ष रंगों का पर्व होली परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, अलग तिथि पर मनाया जाएगा। मैहर, सतना सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में 2 मार्च की रात होलिका दहन किया जाएगा, जबकि रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी। सूतक (शुद्धक) काल लगने के कारण इस बार 3 मार्च को रंग खेलने से परहेज किया जाएगा और तीसरे दिन होली मनाई जाएगी। 

2 मार्च की रात होगा होलिका दहन
धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार 2 मार्च को रात्रि लगभग 11 बजे से होलिका दहन का शुभ मुहूर्त प्रारंभ होगा। यह मुहूर्त सुबह तक रहेगा, जिसके दौरान श्रद्धालु परंपरागत विधि-विधान से होलिका दहन करेंगे। विंध्य क्षेत्र में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग होलिका दहन में शामिल होकर पूजा-अर्चना करते हैं।

सूतक लगने से 3 मार्च को नहीं खेली जाएगी होली
होलिका दहन के बाद सूतक (शुद्धक) काल लगने के कारण कुछ समय तक शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक के दौरान रंग खेलना उचित नहीं माना जाता, इसलिए 3 मार्च को होली नहीं खेली जाएगी। इसी कारण विंध्य क्षेत्र में इस बार 4 मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।

पुजारी ने दी धार्मिक जानकारी
मैहर के मां शारदा मंदिर के पुजारी पवन पाण्डेय ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी होली का पर्व विधि-विधान से मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2 मार्च की रात 11 बजे से सुबह लगभग 6 बजे तक होलिका दहन किया जा सकता है। इसके बाद सूतक लगने के कारण रंग नहीं खेला जाएगा, इसलिए होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

धार्मिक परंपराओं का रखा जाएगा ध्यान
हिंदू संगठन से जुड़े अनुराग मिश्रा ने बताया कि हिंदू धर्म में सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। होली जैसे धार्मिक पर्व में परंपराओं का विशेष महत्व होता है, इसलिए होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को मनाने की अपील की गई है।

होली को लेकर बढ़ा उत्साह
विंध्य क्षेत्र में होली को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। बाजारों में रंग-गुलाल, पिचकारी और मिठाइयों की खरीदारी शुरू हो गई है। लोगों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शांतिपूर्ण माहौल में होली मनाने की तैयारी की जा रही है। 

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