Hockey Jersey Controversy: जर्सी रंग विवाद पर 24 घंटे में बदले दिलीप टिर्की के सुर, उठाए नए सवाल

हॉकी जर्सी के रंग को लेकर शुरू हुए विवाद में हॉकी इंडिया के पूर्व कप्तान दिलीप टिर्की के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। 24 घंटे के अंदर उनके रुख में बदलाव के बाद कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस विवाद की असली वजह क्या है।

Hockey Jersey Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 31, 2026

Hockey Jersey Controversy: भारतीय राष्ट्रीय हॉकी टीमों की जर्सी का पारंपरिक नीला रंग बदलकर केसरिया करने के फैसले को लेकर देश भर में घमासान मच गया है। इस विवाद ने धीरे-धीरे इतना तूल पकड़ लिया है कि अब खेल महासंघ के अंदरूनी सूत्र और पदाधिकारी भी आमने-सामने आते दिखाई दे रहे हैं। शुरुआती बयानों के बाद अब इस मामले में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे खेल जगत में हड़कंप मच गया है।

दिलीप टिर्की का यू-टर्न और स्पष्टीकरण की मांग

गुरुवार को हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की जिस फैसले का पुरजोर समर्थन करते नजर आ रहे थे, वही शुक्रवार को पूरी तरह बदलते हुए रुख अख्तियार कर गए। उन्होंने महासंघ के अन्य पदाधिकारियों को कड़ा पत्र लिखकर इस बात पर गहरा असंतोष जताया है कि उनकी और कार्यकारी बोर्ड की बिना किसी पूर्व जानकारी या सहमति के यह बड़ा फैसला कैसे ले लिया गया।

पूर्व कप्तान ने बोर्ड से पूछा फैसलों का आधार

पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और वर्तमान अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने शुक्रवार को महासंघ के पदाधिकारियों से लिखित सफाई मांगी। उन्होंने ईमेल के जरिए यह जानना चाहा कि जर्सी का रंग बदलने के इस महत्वपूर्ण फैसले का मुख्य आधार क्या था, इसके लिए किस प्रक्रिया का पालन किया गया और किन विषम परिस्थितियों में इसे बिना बोर्ड की मंजूरी के लागू कर दिया गया।

महासचिव भोलानाथ सिंह का अलग दावा

दूसरी ओर, हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने अध्यक्ष के दावों के उलट बयान देते हुए कहा है कि महासंघ के सभी जिम्मेदार अधिकारियों को जर्सी में किए जा रहे इस बदलाव की पूरी जानकारी थी। इस अंतर्विरोध से साफ जाहिर होता है कि हॉकी इंडिया के शीर्ष नेतृत्व के भीतर ही इस नीतिगत फैसले को लेकर आपसी तालमेल और संवाद की भारी कमी रही है।

चौबीस घंटे पहले दिया गया था समर्थन का तर्क

महज चौबीस घंटे पहले, जब जर्सी बदलने का मुद्दा सामने आया था, तब दिलीप टिर्की ने इसके समर्थन में तर्क दिया था कि नीले टर्फ पर नीली जर्सी पहनने से खिलाड़ियों और कोचों को मैच के दौरान विजुअल परेशानी होती है। उन्होंने कहा था कि ओवरलैप की इस समस्या के समाधान के लिए ही जर्सी के रंग में बदलाव करने का यह तकनीकी निर्णय लिया गया था।

पीले और नारंगी रंग के विकल्पों पर हुई थी चर्चा

टिर्की ने गुरुवार को यह भी बताया था कि खिलाड़ियों द्वारा दो अलग-अलग रंगों-पीला और नारंगी के विकल्प सुझाए गए थे। चूंकि नारंगी रंग हमारे राष्ट्रीय ध्वज में भी शामिल है, इसलिए इसे चुनकर नया डिजाइन तैयार किया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि भविष्य में या किसी टूर्नामेंट के बाद खिलाड़ियों को कोई दिक्कत महसूस होती है, तो किट के रंग में दोबारा सुधार किया जा सकता है।

नीदरलैंड और बेल्जियम विश्व कप से पहले बदलाव

नीदरलैंड्स और बेल्जियम में आगामी पंद्रह अगस्त से शुरू होने जा रहे विश्व कप से ठीक पहले भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग नीले से बदलकर पूरी तरह केसरिया कर दिया गया है। इस अचानक हुए बदलाव पर देश के कई दिग्गज पूर्व खिलाड़ियों जैसे वीरेन रासकिन्हा, परगट सिंह, वी भास्करन और धनराज पिल्लै ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कड़े सवाल खड़े किए हैं।

ओडिशा सरकार की आपत्तियों के बाद बदले सुर

सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि जैसे ही ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस मामले पर तीखा ट्वीट किया, उसके तुरंत बाद अध्यक्ष दिलीप टिर्की के तेवर और बयान पूरी तरह बदल गए। ओडिशा सरकार ने इस मसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए महासंघ से आधिकारिक तौर पर स्पष्टीकरण की मांग की थी, जिसके बाद से ही内部 हलचल काफी तेज हो गई है।

नवीन पटनायक ने जर्सी बदलने पर जताया दुख

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा कि भारतीय हॉकी टीम का नीला रंग सिर्फ एक रंग नहीं, बल्कि देश की खेल भावना है। उन्होंने कहा कि दशकों से इस रंग ने देशवासियों को जीत और हार के बीच एकजुट रखा है, और राजनीतिक बदलाव के कारण राष्ट्रीय टीम के पारंपरिक रंगों से खिलवाड़ करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

प्रायोजन संकट के दौर में ओडिशा का ऐतिहासिक योगदान

नवीन पटनायक ने अपने बयान में याद दिलाया कि जब देश की राष्ट्रीय हॉकी टीमें गंभीर प्रायोजन संकट से जूझ रही थीं, तब अकेले ओडिशा ने आगे आकर टीमों को संभाला था। उन्होंने कहा कि 41 साल बाद ओलंपिक पदक जीतने वाली हमारी पुरुष टीम के सफर में राज्य का अभूतपूर्व योगदान रहा है, और इस तरह अचानक रंग बदलना हमारी गौरवशाली खेल विरासत को मिटाने की एक भद्दी कोशिश है।

बिना राय जाने ओडिशा सरकार को ईमेल भेजने का खुलासा

हॉकी इंडिया के सूत्रों के अनुसार, जर्सी का रंग बदलने के बाद गत 30 जुलाई को ओडिशा सरकार को औपचारिक सूचना भेजी गई, जबकि नई जर्सी का अनावरण इससे दो दिन पहले यानी 28 जुलाई को ही कर दिया गया था। कार्यकारी बोर्ड के एक सदस्य ने इस बात की पुष्टि की है कि इस बड़े बदलाव से पहले न तो ओडिशा सरकार को भरोसे में लिया गया और न ही उनसे कोई सलाह ली गई थी।

Read More  : ICC ODI World Cup 2027: 12 वेन्यू का ऐलान, अफ्रीका में लौटेगा क्रिकेट का सबसे बड़ा टूर्नामेंट