इतिहास रचा! कनिष्क नारायण को ब्रिटेन की कैबिनेट में मिली जगह, बने पहले AI मंत्री

लंदन  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इतना आगे बढ़ चुका है कि अब इसके लिए खास मंत्री रखना पड़ रहा है. सरकारों की प्राथमिकता भी एआई बन चुका है. ब्रिटेन ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने भारतीय मूल के सांसद कनिष्क नारायण को AI मंत्री के तौर पर कैबिनेट में शामिल किया है. यह पहली बार है जब ब्रिटेन में AI मंत्री को प्रधानमंत्री की कैबिनेट में जगह मिली है।  कनिष्क नारायण पहले भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन सेफ्टी से जुड़े मंत्री थे, लेकिन अब उनका रोल और बड़ा हो गया है. नई सरकार में

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Published On :

जुलाई 21, 2026

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लंदन 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इतना आगे बढ़ चुका है कि अब इसके लिए खास मंत्री रखना पड़ रहा है. सरकारों की प्राथमिकता भी एआई बन चुका है. ब्रिटेन ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने भारतीय मूल के सांसद कनिष्क नारायण को AI मंत्री के तौर पर कैबिनेट में शामिल किया है. यह पहली बार है जब ब्रिटेन में AI मंत्री को प्रधानमंत्री की कैबिनेट में जगह मिली है। 

कनिष्क नारायण पहले भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन सेफ्टी से जुड़े मंत्री थे, लेकिन अब उनका रोल और बड़ा हो गया है. नई सरकार में उन्हें सीधे कैबिनेट स्तर पर काम करने का मौका मिलेगा. इसका मतलब है कि AI से जुड़े बड़े फैसलों में अब उनका ही रोल होगा। 

कनिष्क नारायण भारतीय मूल के लेबर पार्टी के नेता हैं. उनका परिवार भारत से जुड़ा है, जबकि उनका राजनीतिक सफर ब्रिटेन में रहा है. वह साल 2024 में वेल्स के वेल ऑफ ग्लेमॉर्गन से सांसद चुने गए थे. सितंबर 2025 में उन्हें AI और ऑनलाइन सेफ्टी मंत्री बनाया गया था. अब प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने उन्हें कैबिनेट में प्रमोट कर नई जिम्मेदारी दी है। 

नई सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है. डिपार्टमेंट ऑफ साइंस, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (DSIT) को खत्म कर उसे बिजनेस एंड ट्रेड डिपार्टमेंट में मिला दिया गया है. हालांकि AI से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी कनिष्क नारायण के पास ही रहेगी. सरकार का कहना है कि इससे AI और बिजनेस से जुड़े फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।  

ब्रिटेन पिछले कुछ सालों से खुद को AI हब बनाने की कोशिश कर रहा है. यहां Google DeepMind जैसी बड़ी AI कंपनियां मौजूद हैं. सरकार AI स्टार्टअप, रिसर्च और डेटा सेंटर में निवेश बढ़ा रही है. AI ग्रोथ जोन्स और सॉवरेन AI फंट जैसे प्रोजेक्ट्स भी इसी स्ट्रैटिजी का हिस्सा हैं। 

हालांकि नई सरकार के कुछ फैसलों पर सवाल भी उठ रहे हैं. खासकर DSIT को दूसरे विभाग में मिलाने के फैसले की कई टेक एक्सपर्ट्स ने आलोचना की है. उनका कहना है कि AI और टेक्नोलॉजी के लिए अलग विभाग होना चाहिए. इसके बावजूद सरकार का दावा है कि AI उसकी सबसे बड़ी प्रायॉरिटी में रहेगा और कनिष्क नारायण इस एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे। 

AI को लेकर दुनिया में अमेरिका, चीन और यूरोप के बीच तेजी से कंपटीशन बढ़ रहा है. ऐसे समय में ब्रिटेन का AI मंत्री को कैबिनेट स्तर पर लाना एक बड़ा डेवेलपमेंट है. आने वाले समय में इस तरह के और भी अनाउंसमेंट्स दूसरे देशों में भी हो सकते हैं। 

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