मध्यप्रदेश के बैंक खातों में पहली बार जमा हुए ₹8.17 लाख करोड़, बचत के मामले में देश से आगे निकला MP

भोपाल  बचत जब आदत बन जाती है, तो उसका असर सिर्फ पासबुक तक नहीं रहता, वह बाजार से लेकर रोजगार तक दिखाई देता है। 199 वीं स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश के लिए ऐसा ही भरोसे भरा इतिहास रचा है। प्रदेश में बैंकों की जमा राशि पहली बार 8 लाख करोड़ को पार कर 8,17,367 करोड़ पर पहुंच गई है। यानी एक साल में आम लोगों-कारोबारियों व संस्थानों ने बैंकों में 99,099 करोड़ रुपए अतिरिक्त जमा किए। यह बताता है कि मप्र में बैंकिंग मजबूत हो रही है। हालांकि बैंक जमा में आम लोगों की बचत

Wrriten By :

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Published On :

नवम्बर 7, 2026

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भोपाल 
बचत जब आदत बन जाती है, तो उसका असर सिर्फ पासबुक तक नहीं रहता, वह बाजार से लेकर रोजगार तक दिखाई देता है। 199 वीं स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश के लिए ऐसा ही भरोसे भरा इतिहास रचा है। प्रदेश में बैंकों की जमा राशि पहली बार 8 लाख करोड़ को पार कर 8,17,367 करोड़ पर पहुंच गई है। यानी एक साल में आम लोगों-कारोबारियों व संस्थानों ने बैंकों में 99,099 करोड़ रुपए अतिरिक्त जमा किए। यह बताता है कि मप्र में बैंकिंग मजबूत हो रही है। हालांकि बैंक जमा में आम लोगों की बचत के साथ कारोबारियों-संस्थानों की रकम भी होती है, इसलिए इसे सिर्फ घरेलू बचत नहीं कह सकते, पर यह मप्र की आर्थिक ताकत की तस्वीर तो है।

मप्र की जमा राशि में सालाना वृद्धि 13.80 प्रतिशत
बचत में अपना दम असली कहानी गति की है। 30 जून 2026 तक प्रदेश की कुल जमा में सालाना वृद्धि 13.80 प्रतिशत रही। पिछले साल यह 8.96 प्रतिशत थी। यानी बचत की स्पीड डेढ़ गुनी हो गई।

देश से तुलना करें तो तस्वीर और चमकदार हो जाती है। शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों की जमा वृद्धि राष्ट्रीय स्तर पर 11.35 प्रतिशत रही, जबकि मप्र में यही दर 14.38 फीसदी दर्ज की गई। मतलब साफ है, बचत के मामले में मप्र देश की गति से तेज दौड़ रहा है।

छोटे जिलों में भी जमा राशि का ग्राफ चढ़ा
भोपाल-इंदौर ही नहीं, छोटे जिलों की भी चमक रिपोर्ट का शानदार पहलू भागीदारी है। जमा में भोपाल- इंदौर की बादशाहत कायम है, लेकिन अब ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, उज्जैन, सिंगरौली जैसे जिलों का ग्राफ भी तेजी से चढ़ रहा है। यह संकेत है कि बचत अब सिर्फ महानगरों की कहानी नहीं। छोटे कारोबारी, नौकरीपेशा, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं और ग्रामीण परिवार- सब इस महाअभियान का हिस्सा बन रहे हैं।

ग्वालियर: 100 जमा, 69 कर्ज
ग्वालियर जिले का क्रेडिट डिपॉजिट रेश्यो 69.26 प्रतिशत है। यानी, बैंक में जमा हर 100 में से 69.26 रुपए कर्ज के रूप में बाजार में वापस आ रहे हैं। यह स्थानीय दुकान, स्टार्टअप, किसानी और घर के सपनों को सहारा देने वाला आंकड़ा है।

शाखाएं घटीं, फिर भी भरोसा बढ़ा
एसएलबीसी रिपोर्ट का दिलचस्प पहलू यह है कि मप्र में बैंक शाखाओं की संख्या ८,७८५ से घटकर 8,707 रह गई। एटीएम भी 305 कम हुए। फिर भी जमा 99 हजार करोड़ बढ़ी। यानी, डिजिटल बैंकिंग, यूपीआइ व वित्तीय साक्षरता ने दूरी को पाट दिया है।

ग्वालियर की लीड बैंक ऑफिसर अमिता शर्मा का कहना है, यह सही वक्त है कि युवा, महिलाएं व एमएसएमई उद्यमियों में बचत की अलख और तेज की जाए। बचत आत्मनिर्भरता की नींव गढऩा है।

3 साल में कैसे भरा खजाना
वर्ष (जून तक) कुल जमा राशि
2024— 659215 करोड़ रुपए
2025— 718268 करोड़ रुपए
2026— 817367 करोड़ रुपए

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