Haryana News: हिसार के क्रांतिमान पार्क में सोमवार को छात्र हित महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल होने लगे हैं। इस महापंचायत का आयोजन विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा किया जा रहा है। इसमें केवल छात्र ही नहीं, बल्कि खाप प्रतिनिधि और कई सामाजिक संगठन भी भाग ले रहे हैं, जिससे कार्यक्रम का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ गए हैं।
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छात्र चुनाव बहाली बना मुख्य मुद्दा
आपको बता दें कि, इस महापंचायत का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदेश में छात्र संघ चुनावों की बहाली है। लंबे समय से छात्र संगठन इस मांग को उठाते आ रहे हैं और अब इसे लेकर एकजुट होकर आवाज बुलंद की जा रही है। छात्रों का कहना है कि चुनाव न होने से उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी प्रभावित हो रही है। इस दौरान इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (इनसो) के प्रदेशाध्यक्ष दीपक मलिक ने कहा कि महापंचायत का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में छात्र अधिकारों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके खिलाफ यह मंच तैयार किया गया है।
कार्यक्रम को राजनीति से जोड़ने के आरोप
दीपक मलिक ने यह भी स्पष्ट किया कि इस महापंचायत को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, जबकि इसका उद्देश्य पूरी तरह गैर-राजनीतिक है। उन्होंने कहा कि इसमें सभी छात्र संगठनों की भागीदारी है और यह केवल छात्र हितों की रक्षा के लिए आयोजित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मंच पर छात्र संघ चुनाव बहाली के अलावा अन्य शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी, जो छात्रों के भविष्य से जुड़े हैं।
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जीजेयू में कार्यक्रम की अनुमति न मिलने पर नाराजगी
छात्र नेताओं ने गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रशासन ने इसे मंजूरी नहीं दी। इनसो के कार्यकर्ता जब कुलपति से मिलने पहुंचे, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। हालांकि, दर्ज धाराएं गंभीर नहीं थीं और आरोप केवल मामूली नुकसान, जैसे गमले तोड़ने, तक सीमित थे। इसके बावजूद कार्रवाई को लेकर छात्रों में नाराजगी देखी गई।
छात्र नेताओं पर कार्रवाई को लेकर सवाल
छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि कुछ छात्र नेताओं को देर रात पुलिस द्वारा उठाया गया और उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, मानो वे बड़े अपराधी हों। बताया गया कि जिन छह लोगों को हिरासत में लिया गया, उनमें से पांच का नाम एफआईआर में शामिल ही नहीं था। इसके अलावा, जब जिन छात्रों के नाम एफआईआर में थे, वे खुद गिरफ्तारी देने पहुंचे, तो उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर छात्रों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और इसे डर का माहौल बनाने की कोशिश बताया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय मामले पर भी उठे सवाल
महापंचायत में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से जुड़े एक अन्य मामले पर भी चर्चा की गई। छात्र नेताओं ने कहा कि वहां एक कार्यक्रम के दौरान कुर्सियां टूटने का आरोप लगाया गया था, जिस पर छात्रों ने नुकसान की भरपाई करने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के विरोध के बाद वहां भी छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। साथ ही यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया निष्पक्ष नहीं है।
शिक्षा व्यवस्था और विचारधारा पर बहस
छात्र संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है और कुछ विशेष विचारधाराओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले कुलपतियों की नियुक्ति शैक्षणिक योग्यता के आधार पर होती थी, लेकिन अब इसमें बदलाव देखने को मिल रहा है।









