Himachal Pradesh Budget: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज विधानसभा में अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश किया, जिसमें ‘गांव’ और ‘किसान’ केंद्र बिंदु में रहे। इस बजट के माध्यम से सरकार ने ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए खजाने के द्वार खोल दिए हैं। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों ने पहले ही उत्साह बढ़ा दिया था, जिसमें प्रति व्यक्ति आय में 10% की वृद्धि और बजट के दायरे में 6,000 करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज किया गया है।
गाय-भैंस के दूध के समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोतरी
बताते चले कि, प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने के लिए मुख्यमंत्री ने पशुपालकों के लिए ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं। सरकार ने पशुपालन को एक सम्मानजनक और लाभप्रद व्यवसाय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गाय के दूध का समर्थन मूल्य (MSP) 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसी तरह, भैंस के दूध का दाम भी बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
इस निर्णय का सीधा लाभ उन हजारों ग्रामीणों को मिलेगा जो पहाड़ों की ढलानों पर बसे गांवों में पशुपालन के जरिए अपना जीवन यापन कर रहे हैं। दुग्ध खरीद की कीमतों में इस वृद्धि से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि जो युवा इस क्षेत्र से कतरा रहे थे, वे भी अब डेयरी फार्मिंग को एक स्थायी आय का स्रोत मानकर इससे जुड़ेंगे।
मत्स्य पालन और मछुआरा कल्याण योजना
ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना’ का आगाज किया है। हिमाचल के इतिहास में पहली बार जलाशयों की मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का प्रावधान किया गया है। यदि बाजार में मछली की कीमत 100 रुपये प्रति किलो से नीचे गिरती है, तो सरकार 20 रुपये प्रति किलो तक का अनुदान सीधे मछुआरों के खाते में (DBT) भेजेगी।
इसके अतिरिक्त, मछुआरों पर लगने वाली रॉयल्टी को 15% से घटाकर मात्र 1% करने की घोषणा की गई है, जिससे राज्य के 6,000 से अधिक परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी। मानसून के दौरान जब मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है, तब मछुआरों की आजीविका प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार ने उन्हें 3,500 रुपये की वार्षिक सम्मान निधि देने का भी निर्णय लिया है।
कृषि सुधार और राज्य किसान आयोग का गठन
मुख्यमंत्री सुक्खू ने चुनाव के दौरान दी गई अपनी गारंटियों को पूरा करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए प्रदेश में ‘राज्य किसान आयोग’ (State Farmers Commission) के गठन की घोषणा की गई है।
यह आयोग एक सशक्त निकाय के रूप में कार्य करेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना, उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान निकालना और उन्हें नई कृषि तकनीकों से जोड़कर सशक्त बनाना होगा। कृषि सुधारों के इस रोडमैप से स्पष्ट है कि सरकार आगामी वित्त वर्ष में बागवानी और खेती को राज्य की जीडीपी का मुख्य आधार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।









