High Court: मद्रास हाई कोर्ट ने पलटा सरकार का फैसला, करूर पीड़ितों की नौकरी पर रोक

करूर भगदड़ मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले की CBI जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी को देखते हुए यह फैसला लिया गया।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 27, 2026

High Court: तमिलनाडु की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के उन सरकारी आदेशों (जीओ) को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, जिनके तहत करूर भगदड़ में अपनी जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरियां दी जानी थीं। यह पूरा फैसला उन जनहित याचिकाओं (PIL) की सुनवाई के बाद आया, जिन्हें इस पुनर्वास पैकेज के खिलाफ अदालत में चुनौती दी गई थी। कोर्ट के इस निर्णय को विजय सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

मामلات की सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि करूर भगदड़ की घटना की गंभीर जांच इस समय देश की प्रमुख जांच एजेंसी यानी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है, और इस पूरी जांच प्रक्रिया की सीधी निगरानी देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) कर रही है। अदालत ने कहा कि चूंकि यह मामला पहले से ही न्यायिक जांच और सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के दायरे में है, इसलिए इस स्तर पर अदालत के लिए मामले के गुण-दोष पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने राज्य सरकार के संबंधित सरकारी आदेशों को निरस्त करने का निर्देश दिया।

क्या था पूरा मामला और सरकार का फैसला?

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विजय ने गत 10 जुलाई को पदभार संभालने के बाद अपने पहले करूर दौरे के दौरान सितंबर 2025 में हुई करूर भगदड़ से प्रभावित परिवारों के लिए एक व्यापक पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत की थी।

इस दुखद घटना में कुल 41 लोगों की जान गई थी।

राहत और पुनर्वास के तहत राज्य सरकार ने इन सभी पीड़ित परिवारों में से 32 पात्र सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र सौंपे थे।

सरकार का उद्देश्य प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को स्थायी आजीविका और संबल प्रदान करना था, जिसे सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण से एक बड़ा कदम बताया था।

करूर दौरे के दौरान उठाए गए थे कदम

अपने करूर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने जिला कलेक्टर कार्यालय में मृतकों के शोक संतप्त परिजनों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी और उनकी समस्याओं व शिकायतों को ध्यान से सुना था। इसके बाद उन्होंने एक जनसभा को भी संबोधित करते हुए पीड़ितों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया था। हालांकि, सरकार द्वारा दिए गए इन नियुक्ति पत्रों और जारी किए गए सरकारी आदेशों को कुछ जनहित याचिकाओं के जरिए मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने रोक लगाते हुए आदेश को रद्द कर दिया है।

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