900 किलोमीटर की पदयात्रा कर हेमंत सूर्यवंशी पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह से मिलने, MLA ने किया स्वागत

मुंबई महाराष्ट्र के हेमंत सूर्यवंशी ने प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की एक अनोखी मिसाल पेश की है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रति अपने स्नेह और सम्मान के चलते हेमंत सूर्यवंशी उज्जैन (मध्य प्रदेश) से उत्तर प्रदेश के विश्नोहरपुर तक करीब 900 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर पहुंचे। बृजभूषण के बड़े बेटे विधायक प्रतीक भूषण सिह ने हेमंत का जोरदार स्वागत किया। उनकी यह यात्रा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।   हेमंत सूर्यवंशी मूल रूप से महाराष्ट्र के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 8 जनवरी को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन के

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Published On :

जनवरी 28, 2026

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मुंबई
महाराष्ट्र के हेमंत सूर्यवंशी ने प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की एक अनोखी मिसाल पेश की है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रति अपने स्नेह और सम्मान के चलते हेमंत सूर्यवंशी उज्जैन (मध्य प्रदेश) से उत्तर प्रदेश के विश्नोहरपुर तक करीब 900 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर पहुंचे। बृजभूषण के बड़े बेटे विधायक प्रतीक भूषण सिह ने हेमंत का जोरदार स्वागत किया। उनकी यह यात्रा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
 
हेमंत सूर्यवंशी मूल रूप से महाराष्ट्र के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 8 जनवरी को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए और उनके दीर्घायु व स्वस्थ जीवन की कामना की। इसके बाद उन्होंने पैदल ही गोंडा के विश्नोहरपुर की ओर अपनी यात्रा शुरू की।

यात्रा के दौरान हेमंत सूर्यवंशी लगातार पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की तस्वीर अपने साथ रखे रहे। उन्होंने बताया कि इसी तस्वीर के कारण उन्हें रास्ते भर लोगों का भरपूर सहयोग, सम्मान और आतिथ्य मिलता रहा। कई स्थानों पर लोगों ने उनके ठहरने, भोजन और आराम की व्यवस्था की, जिससे उनकी लंबी और कठिन यात्रा अपेक्षाकृत सहज हो सकी।

करीब एक हजार किलोमीटर की यह पदयात्रा पूरी कर जब हेमंत सूर्यवंशी विश्नोहरपुर पहुंचे, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। बृजभूषण के बड़े बेटे विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने हेमंत सूर्यवंशी का स्वागत करते हुए उनके समर्पण और भावनात्मक लगाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के समय में इस तरह का समर्पण और श्रद्धा दुर्लभ है।

हेमंत सूर्यवंशी की इस यात्रा को लोग प्रेम, विश्वास और आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। उनकी पदयात्रा यह संदेश देती है कि सच्चा सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव किसी भी दूरी को छोटा बना सकता है। क्षेत्र में उनकी इस अनोखी पहल की हर ओर सराहना हो रही है।

 

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