Health Tips: अगर आप मीठा खाने से बचते हैं, खान-पान का ध्यान रखते हैं और फिर भी ब्लड शुगर बढ़ी हुई मिल रही है, तो इसकी एक वजह तनाव भी हो सकती है। तनाव का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के हार्मोन और ब्लड ग्लूकोज को भी प्रभावित कर सकता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के मुताबिक, तनाव ब्लड ग्लूकोज बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है।
Health Tips: सुबह खजूर खाने की क्यों दी जाती है सलाह? डॉक्टर ने बताए
तनाव के समय शरीर में क्या होता है?
जब इंसान तनाव में होता है, तो शरीर खुद को किसी चुनौती या खतरे से निपटने के लिए तैयार करता है। इसे ‘फाइट या फ्लाइट’ प्रतिक्रिया कहा जाता है। इस दौरान शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। इन हार्मोनों का एक अहम काम शरीर को तुरंत ऊर्जा उपलब्ध कराना है। इसके लिए लिवर जमा ग्लूकोज को रक्त में छोड़ सकता है। नतीजतन, बिना कोई मीठी चीज खाए भी कुछ समय के लिए ब्लड शुगर बढ़ सकती है।
कोर्टिसोल क्यों है महत्वपूर्ण?
कोर्टिसोल को अक्सर ‘स्ट्रेस हार्मोन’ कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यह शरीर के लिए जरूरी है और ऊर्जा के इस्तेमाल, तनाव से निपटने और कई दूसरे शारीरिक कार्यों में भूमिका निभाता है। लेकिन अगर तनाव लगातार बना रहे, तो शरीर लंबे समय तक तनाव से जुड़े हार्मोनों के प्रभाव में रह सकता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, कोर्टिसोल बढ़ने पर शरीर के कुछ ऊतक इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो सकते हैं, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ सकता है।
डायबिटीज में क्यों बढ़ जाती है परेशानी?
डायबिटीज वाले लोगों में ब्लड शुगर को नियंत्रित करना पहले से ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है। टाइप-2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जबकि टाइप-1 डायबिटीज में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। ऐसे में तनाव के कारण अतिरिक्त ग्लूकोज रक्त में आने या इंसुलिन की संवेदनशीलता प्रभावित होने से शुगर को सामान्य सीमा में बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। लगातार तनाव के अलावा बीमारी, दर्द और नींद की कमी जैसे कारक भी ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित कर सकते हैं।
तनाव कम करने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?
ब्लड शुगर मैनेजमेंट में सिर्फ डाइट और दवाओं पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है। तनाव को नियंत्रित करना और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
- रोज पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश करें।
- नियमित वॉक या एक्सरसाइज को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
- मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग जैसी तकनीकों का अभ्यास करें।
- संतुलित और पौष्टिक डाइट लें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
- लगातार तनाव महसूस होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लें।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के ब्लड शुगर लगातार बढ़ रही है, तो इसे केवल तनाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। भोजन, दवाएं, शारीरिक गतिविधि, बीमारी, नींद और तनाव—कई कारक ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए शुगर बार-बार बढ़ने पर डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना बेहतर है। खासकर डायबिटीज की दवा या इंसुलिन की मात्रा में बदलाव खुद से नहीं करना चाहिए।
Health Tips: सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलती है तो सावधान! इन 5 वजहों को










