Amit Shah Goa : गोवा में अमित शाह ने गिनाईं सुरक्षा उपलब्धियां, आतंकवाद और नक्सलवाद पर कार्रवाई तेज

गोवा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोदी सरकार के दौरान आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर उठाए गए कदमों और उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर, नक्सलवाद, पूर्वोत्तर, आतंकवाद और भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र किया। अब चर्चा इस बात की है कि सरकार की अगली सुरक्षा रणनीति किन चुनौतियों पर केंद्रित होगी।

Amit Shah Goa

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 6, 2026

Amit Shah Goa :  गोवा के डोना पॉला में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के समय आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सलवाद जैसी चुनौतियां गंभीर थीं। जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और देश के कई हिस्सों में हिंसक गतिविधियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थीं।

आतंकवाद और बम धमाकों की घटनाओं पर जोर

अमित शाह ने कहा कि एक समय देश के विभिन्न हिस्सों में बम धमाकों की घटनाएं सामने आती थीं। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं थीं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद तथा पूर्वोत्तर में उग्रवादी गतिविधियां लंबे समय से सरकार के सामने चुनौती थीं। उनके अनुसार, पिछले वर्षों में इन समस्याओं से निपटने के लिए सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया गया।

अनुच्छेद 370 के बाद कश्मीर में बदलाव

गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि 2019 के बाद घाटी की परिस्थितियों में बदलाव आया है। उनके मुताबिक, अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई और आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं पर भी नियंत्रण बढ़ा है। शाह ने दावा किया कि कश्मीर में मानसिक दूरियां कम हुई हैं और क्षेत्र अब विकास तथा शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सफलता

अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दशकों पुरानी यह समस्या अब काफी हद तक कमजोर हो चुकी है। उनके अनुसार, जिन इलाकों में कभी ‘रेड कॉरिडोर’ विस्तार की बात होती थी, वहां कई लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का विकल्प चुना है। सरकार सुरक्षा के साथ विकास पर भी जोर दे रही है।

पूर्वोत्तर में शांति समझौतों का जिक्र

पूर्वोत्तर की स्थिति पर शाह ने कहा कि लगभग 10 हजार युवाओं ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए 14 से अधिक शांति समझौते किए गए हैं। गृह मंत्री के मुताबिक, सुरक्षा अभियानों और समझौतों के संयुक्त प्रभाव से पूर्वोत्तर में शांति स्थापित करने और विकास की संभावनाओं को मजबूत करने में मदद मिली है।

विदेशों से भगोड़ों की वापसी का दावा

आर्थिक अपराधों के बाद विदेशों में छिपने वाले आरोपियों पर कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री ने आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया। इन लोगों को भारतीय कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। शाह ने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

भारत-पोल से एजेंसियों के बीच तालमेल

अमित शाह ने ‘भारत-पोल’ प्रणाली का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए 14 से अधिक केंद्रीय एजेंसियों और देशभर की पुलिस को आपस में जोड़ा गया है। गृह मंत्री ने दावा किया कि इसकी मदद से भगोड़ों से संबंधित करीब 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां सील की जा चुकी हैं। इसका उद्देश्य विदेशों में छिपे आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को तेज करना है।

साइबर अपराध के खिलाफ हेल्पलाइन 1930

साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 को भी गृह मंत्री ने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था साइबर अपराध के मामलों में लोगों की मदद कर रही है। शाह ने नए आपराधिक कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि इनके लागू होने के बाद जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में परिणाम दिखाई देने लगे हैं।

गोवा की बढ़ी कनविक्शन रेट का उदाहरण

गोवा पुलिस की कार्यप्रणाली की तारीफ करते हुए शाह ने राज्य की दोषसिद्धि दर का उदाहरण दिया। उनके अनुसार, नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद गोवा में कनविक्शन रेट 22 प्रतिशत से बढ़कर 53.2 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने इसे पुलिस जांच और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में सुधार से जोड़ते हुए राज्य की उपलब्धि बताया।

2029 तक ड्रग-फ्री भारत का लक्ष्य

अमित शाह ने कहा कि सरकार ने 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने ड्रग तस्करी को केवल सामाजिक समस्या न मानते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा। उनके मुताबिक, नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।

NCORD के जरिए राज्यों से समन्वय

नशे के खिलाफ अभियान में NCORD और राज्यों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के बीच समन्वय बढ़ाने पर सरकार जोर दे रही है। केंद्र और राज्य एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई करने की रणनीति अपनाई जा रही है। सरकार का लक्ष्य आतंकवाद और नक्सलवाद के साथ-साथ नशे के खिलाफ भी मजबूत अभियान चलाकर सुरक्षित भारत की दिशा में आगे बढ़ना है।

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