Haryana News: कुश्ती में उम्र घोटाले पर सख्ती, हरियाणा ने अपनाई डिजिटल वेरिफिकेशन प्रणाली

हरियाणा ने कुश्ती में उम्र फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आधार और OTP आधारित डिजिटल वेरिफिकेशन लागू किया है। इस नई प्रणाली से खिलाड़ियों की वास्तविक उम्र तुरंत सत्यापित होगी और जन्म प्रमाण पत्र में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।

हरियाणा ने अपनाई डिजिटल वेरिफिकेशन प्रणाली

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 19, 2026

Haryana News: हरियाणा ने खेल जगत में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम उम्र मे हेराफेरी रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में कुश्ती खिलाड़ियों के लिए आधार डिजिटल उम्र सत्यापन प्रणाली लागू कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों की उम्र की पुष्टि आधार ऐप और ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आधारित वेरिफिकेशन के जरिए की जाएगी। इस पहल को लागू करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है, जहां कुश्ती जैसे खेल में पूरी तरह डिजिटल तरीके से आयु सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

Haryana News: NEET परीक्षार्थियों के लिए खुशखबरी! हरियाणा रोडवेज बसों में सफर बिल्कुल फ्री

कुश्ती संघ ने अपनाई नई तकनीकी व्यवस्था

आपको बता दें कि, भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के निर्देशों के बाद हरियाणा कुश्ती संघ ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब खिलाड़ियों की उम्र का सत्यापन केवल जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे डिजिटल पहचान प्रणाली से जोड़ा गया है। हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष रमेश बोहर के अनुसार, इस नई व्यवस्था की शुरुआत रोहतक स्थित एमडीयू (महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय) में 10 से 12 जुलाई तक आयोजित होने वाली अंडर-23 राज्य कुश्ती प्रतियोगिता से की जाएगी।

फर्जीवाड़े के मामलों के बाद लिया गया फैसला

हाल ही में गोंडा में आयोजित अंडर-17 राष्ट्रीय रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट के दौरान उम्र में हेराफेरी के कई गंभीर मामले सामने आए थे। इसके बाद भारतीय कुश्ती महासंघ ने सख्त रुख अपनाते हुए जन्म प्रमाण पत्र आधारित सत्यापन को रद्द कर दिया। इसके स्थान पर अब आधार कार्ड और डिजिटल वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया गया है, जिससे खिलाड़ियों की वास्तविक उम्र की पुष्टि आसानी से की जा सके।

कैसे होगा उम्र का डिजिटल सत्यापन

नई प्रणाली के तहत प्रत्येक खिलाड़ी का सत्यापन पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से किया जाएगा। इसमें आधार डेटाबेस को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से जोड़ा जाएगा। सत्यापन के दौरान खिलाड़ी के मोबाइल पर एक ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) भेजा जाएगा, जिसे दर्ज करने के बाद उसकी पहचान और उम्र की पुष्टि की जाएगी। इस प्रक्रिया को “लाइव वेरिफिकेशन सिस्टम” कहा जा रहा है, जिसमें सरकारी मान्यता प्राप्त डेटाबेस से सीधे जानकारी प्राप्त की जाएगी। इससे किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

खेल में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खेलों में पारदर्शिता लाना और योग्य खिलाड़ियों को सही अवसर प्रदान करना है। अब केवल वही खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगे, जिनकी उम्र और पहचान पूरी तरह प्रमाणित होगी। इससे न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, बल्कि युवा खिलाड़ियों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा भी सुनिश्चित होगी। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय कुश्ती को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाएगा।

हरियाणा बना देश का पहला राज्य

इस डिजिटल उम्र सत्यापन प्रणाली को अपनाने के साथ ही हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने कुश्ती में आधार आधारित ओटीपी वेरिफिकेशन लागू किया है। यह पहल खेल प्रशासन में तकनीक के बढ़ते उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य खेलों और राज्यों में भी लागू किए जाने की संभावना है, जिससे पूरे देश में खेल प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

योगी सरकार की सामूहिक विवाह योजना बनी OBC परिवारों का सहारा, हजारों घरों को मिली राहत