Haryana News: हरियाणा बना भारत का स्पोर्ट्स पावरहाउस, 2% आबादी से देश को दिला रहा सबसे ज्यादा मेडल

हरियाणा की आबादी देश में सिर्फ 2 प्रतिशत है, लेकिन खेलों में इसका दबदबा पूरे भारत पर भारी है। ओलंपिक से लेकर राष्ट्रमंडल खेलों तक हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। जानिए कैसे मजबूत खेल नीति, प्रशिक्षण और सरकार के प्रयासों ने राज्य को भारत का स्पोर्ट्स पावरहाउस बना दिया।

हरियाणा बना भारत का स्पोर्ट्स पावरहाउस

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 7, 2026

Haryana News: हरियाणा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि खेलों में सफलता केवल बड़ी आबादी या संसाधनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मजबूत खेल नीति, खिलाड़ियों की मेहनत और बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था से हासिल होती है। देश की कुल आबादी में लगभग 2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला यह राज्य वर्षों से भारत के लिए सबसे अधिक पदक जीतने वाले राज्यों में शामिल है। ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में हरियाणा के खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है। यही वजह है कि आज हरियाणा को भारत का “स्पोर्ट्स पावरहाउस” कहा जाता है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भी दिखा हरियाणा का जलवा

हाल ही में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भी हरियाणा के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपनी पहचान मजबूत की। भारत को मिले कुल 39 पदकों में से 11 पदक हरियाणा के खिलाड़ियों के नाम रहे। खास बात यह रही कि देश के 13 स्वर्ण पदकों में से 7 गोल्ड मेडल अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। इनमें भिवानी की महिला मुक्केबाजों ने पांच स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश का गौरव बढ़ाया और एक बार फिर साबित किया कि हरियाणा की बेटियां किसी से कम नहीं हैं।

भिवानी की मुक्केबाजी अकादमियां बनीं पहचान

भिवानी लंबे समय से भारत की बॉक्सिंग राजधानी के रूप में जाना जाता है। यहां की खेल अकादमियों ने कई अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज तैयार किए हैं। इस बार भी सचिन सिवाच, साक्षी चौधरी, प्रीति पंवार, प्रिया घणघस और जैस्मीन लांबोरिया ने स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। वहीं हिसार के अंकुश पंघाल ने गोल्ड और नरेंद्र बेरवाल ने सिल्वर मेडल जीतकर हरियाणा की सफलता में अहम योगदान दिया।

एथलेटिक्स और पैरा स्पर्धाओं में भी शानदार प्रदर्शन

हरियाणा के खिलाड़ियों ने केवल मुक्केबाजी ही नहीं, बल्कि एथलेटिक्स और पैरा खेलों में भी शानदार प्रदर्शन किया। झज्जर की शर्मीला ने पैरा शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीता, जबकि स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने रजत पदक अपने नाम किया। इसके अलावा यशवीर और सीमा ने कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में और सफलता जोड़ी।

कम पदक के पीछे खेलों की संख्या बनी वजह

इस बार हरियाणा के पदकों की संख्या पहले की तुलना में कम जरूर रही, लेकिन इसकी वजह खिलाड़ियों का प्रदर्शन नहीं बल्कि राष्ट्रमंडल खेलों से कई प्रमुख खेलों का हटाया जाना रहा। वर्ष 2022 में कुश्ती, हॉकी, निशानेबाजी, क्रिकेट और बैडमिंटन जैसे खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों ने कई पदक जीते थे। इस बार इन खेलों के शामिल न होने से पदकों की संभावनाएं स्वतः कम हो गईं।

सरकार की खेल नीति बनी सबसे बड़ी ताकत

हरियाणा सरकार की “पदक लाओ-इनाम पाओ” नीति खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बनी हुई है। ओलंपिक स्वर्ण विजेताओं को 6 करोड़, रजत विजेताओं को 4 करोड़ और कांस्य विजेताओं को 2.5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी जाती है। इसी तरह एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में भी विजेताओं को करोड़ों रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

तैयारी के दौरान भी मिलता है आर्थिक सहयोग

सरकार केवल पदक जीतने के बाद ही नहीं, बल्कि प्रतियोगिता की तैयारी के दौरान भी खिलाड़ियों की मदद करती है। ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों को 5 लाख रुपये की अग्रिम सहायता दी जाती है। वहीं एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों के खिलाड़ियों को भी आर्थिक सहयोग और छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों को मासिक सम्मान राशि भी दी जाती है।

खेल नर्सरियों से तैयार हो रही नई पीढ़ी

प्रदेश में दो हजार से अधिक खेल नर्सरियां संचालित की जा रही हैं, जहां बचपन से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया जाता है। आधुनिक खेल विज्ञान, अनुभवी कोच और विश्वस्तरीय सुविधाओं के माध्यम से भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2036 के ओलंपिक में भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना है।

महिला खिलाड़ियों ने बदली हरियाणा की तस्वीर

हरियाणा की बेटियां आज खेल जगत में नई पहचान बना चुकी हैं। साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, गीता फोगाट, बबीता फोगाट, मनु भाकर और शैफाली वर्मा जैसी खिलाड़ियों ने देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया है। सरकार भी महिला खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति और आधुनिक सुविधाएं देकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है।

देश के लिए प्रेरणा बना हरियाणा मॉडल

हरियाणा की सफलता केवल पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मजबूत खेल नीति, बेहतर बुनियादी ढांचे और खिलाड़ियों को मिलने वाले सम्मान का परिणाम है। महज 2 प्रतिशत आबादी वाला यह राज्य देश के लिए सबसे अधिक पदक जीतकर पूरे भारत के लिए प्रेरणा बन चुका है। यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में हरियाणा वैश्विक खेल मानचित्र पर भी अपनी अलग पहचान और मजबूत करेगा।

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