Haryana SC Commission: बंतो कटारिया चेयरपर्सन, रेनू डाबला बनीं वाइस चेयरपर्सन

हरियाणा में अनुसूचित जाति आयोग को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। बंतो कटारिया को चेयरपर्सन और रेनू डाबला को वाइस चेयरपर्सन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आखिर सरकार ने इन दोनों नामों पर क्यों जताया भरोसा और नई नियुक्तियों का सामाजिक न्याय की योजनाओं पर क्या असर पड़ेगा? जानें पूरी कहानी।

रेनू डाबला बनीं वाइस चेयरपर्सन

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 8, 2026

Haryana SC Commission: हरियाणा सरकार ने राज्य अनुसूचित जाति आयोग में नई नियुक्तियों को मंजूरी दी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक बंतो कटारिया को हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग की चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। वहीं रेनू डाबला को वाइस चेयरपर्सन की जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद आधिकारिक रूप दिया गया है।

सरकार के इस फैसले को अनुसूचित जाति और समाज के वंचित वर्गों से जुड़े मामलों में संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई नियुक्तियों के बाद आयोग के स्तर पर सामाजिक न्याय, अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर काम को गति मिलने की उम्मीद है।

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बंतो कटारिया को मिली अहम जिम्मेदारी

बंतो कटारिया लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी रही हैं। उन्होंने संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और अंबाला से सांसद रहे स्वर्गीय रत्न लाल कटारिया की पत्नी हैं। कटारिया परिवार का अंबाला और आसपास के क्षेत्रों की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। रत्न लाल कटारिया के निधन के बाद भी बंतो कटारिया सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें अंबाला सुरक्षित सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि इस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता जारी रही।

लोकसभा चुनाव के बाद भी पार्टी का भरोसा कायम

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बंतो कटारिया पर भरोसा जताते हुए उन्हें अंबाला सीट से मैदान में उतारा था। पार्टी के फैसले में उनके राजनीतिक अनुभव और कटारिया परिवार की क्षेत्रीय पहचान को अहम माना गया था।

चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा, लेकिन इसके बावजूद भाजपा ने उन्हें संगठन और अब सरकारी व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। आयोग की चेयरपर्सन के रूप में उनकी नियुक्ति को राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर रहेगा जोर

अनुसूचित जाति आयोग का काम अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े अधिकारों, शिकायतों और सामाजिक न्याय के मामलों की निगरानी से जुड़ा है। ऐसे में बंतो कटारिया के सामने आयोग के कामकाज को प्रभावी बनाने और जरूरतमंद लोगों तक संस्थागत सहायता पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाना भी प्राथमिकता में रहेगा। अनुसूचित जाति और अन्य कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में शिकायतों के समाधान और अधिकारों की सुरक्षा पर आयोग की भूमिका अहम हो सकती है।

रेनू डाबला को वाइस चेयरपर्सन की जिम्मेदारी

रेनू डाबला को आयोग में वाइस चेयरपर्सन का पद दिया गया है। उनके साथ मिलकर आयोग की कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने और अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी।

कटारिया परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर

बंतो कटारिया की नई जिम्मेदारी को उनके राजनीतिक सफर के अगले चरण के रूप में भी देखा जा रहा है। उनके पति स्वर्गीय रत्न लाल कटारिया भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे और केंद्र सरकार में मंत्री पद भी संभाला था। अब आयोग की चेयरपर्सन के तौर पर बंतो कटारिया के सामने राजनीतिक अनुभव को सामाजिक न्याय और जनकल्याण के काम से जोड़ने का अवसर है। अंबाला और हरियाणा में उनके सामाजिक संपर्क भी इस भूमिका में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

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संगठन के अनुभव का सरकार में इस्तेमाल

भाजपा संगठन में लंबे समय तक काम करने के कारण बंतो कटारिया को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर संवाद का अनुभव है। अब इस अनुभव का इस्तेमाल आयोग की जिम्मेदारी निभाने में किया जा सकता है। नई नियुक्ति के साथ उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने और उनके समाधान की प्रक्रिया को मजबूत करने में योगदान देंगी।