Haryana News: हरियाणा में निजी स्कूलों के संचालन और उनकी सोसाइटियों के पंजीकरण को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हरियाणा प्राईवेट स्कूल संघ ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक औपचारिक पत्र लिखकर मांग की है कि सोसाइटियों पर लगाए गए भारी-भरकम जुर्माने को तुरंत माफ करने का आधिकारिक पत्र (लेटर) जारी किया जाए। संघ का कहना है कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद महीनों बीत जाने के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी है।
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सोसाइटी एक्ट 2012 और जुर्माने का विवाद
हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ सोसायटी एक्ट 2012 के तहत राज्य की सभी पंजीकृत सोसाइटियों के लिए रिन्यूअल की प्रक्रिया अनिवार्य की गई थी। इसके लिए सरकार ने 700 रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया था। विवाद तब शुरू हुआ जब 2017 में इस प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया और देरी होने पर 20 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लागू कर दिया गया। संघ का आरोप है कि इस जुर्माने के प्रावधान के बारे में सोसाइटियों को कोई औपचारिक नोटिस या सूचना नहीं दी गई, जिससे अनजाने में यह राशि बढ़ती चली गई।
2013 से बैकडेट जुर्माना
संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने एक गंभीर तकनीकी खामी की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि जब शुल्क जमा करने की ऑनलाइन व्यवस्था साल 2017 में शुरू हुई, तो जुर्माना 2013 से क्यों वसूला जा रहा है? बिना किसी पूर्व सूचना के पिछले कई वर्षों का ‘बैकडेट’ जुर्माना लगाना न्यायसंगत नहीं है। वर्तमान में, यह पेनल्टी राशि इतनी अधिक हो चुकी है कि कई छोटी स्कूल सोसाइटियों के लिए इसे चुकाना उनके बजट से बाहर हो गया है, जिससे उनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
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मुख्यमंत्री के आश्वासन
इस गंभीर समस्या को लेकर हरियाणा प्राईवेट स्कूल संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से दो बार मुलाकात कर चुका है। पहली बैठक 17 अक्टूबर 2025 को हुई थी और दूसरी 29 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित की गई थी। इन मुलाकातों के दौरान सीएम ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया था कि स्कूलों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस जुर्माने को माफ कर दिया जाएगा। हालांकि, इस मौखिक आश्वासन को बीते छह महीने से अधिक का समय हो गया है, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है।
अधर में लटका रिन्यूअल और संघ की कड़ी मांग
आधिकारिक पत्र या नोटिफिकेशन जारी न होने के कारण पोर्टल पर अभी भी पुराना भारी-भरकम जुर्माना दिखाई दे रहा है। इसके परिणामस्वरूप, हजारों स्कूल सोसाइटियां अपना नियमित वार्षिक शुल्क जमा नहीं कर पा रही हैं क्योंकि वे पहले उस भारी जुर्माने को हटाने की प्रतीक्षा कर रही हैं। संघ ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री से अपील की है कि इस प्रशासनिक देरी को खत्म किया जाए और तुरंत नोटिफिकेशन जारी किया जाए ताकि स्कूल बिना किसी मानसिक और आर्थिक दबाव के अपना संचालन जारी रख सकें।









