Haryana Private Bus Rules: हरियाणा परिवहन विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश, मनमानी पर लगेगी लगाम

हरियाणा में निजी बस संचालकों की मनमानी अब नहीं चलेगी! परिवहन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश की सभी 1750 निजी बसों में छात्रों, दिव्यांगों और बुजुर्गों के रियायती पास को अनिवार्य रूप से मान्य कर दिया है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 22, 2026

Haryana Private Bus Rules: हरियाणा सरकार ने राज्य के हजारों छात्रों, दिव्यांगों और बुजुर्गों को बड़ी राहत देते हुए निजी बस संचालकों की मनमानी पर रोक लगा दी है। अक्सर देखा जाता था कि निजी बस चालक छात्रों और पास धारकों को बस में चढ़ाने से कतराते थे या उनके साथ दुर्व्यवहार करते थे। अब परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि स्टेट कैरिज स्कीम के तहत चलने वाली सभी निजी बसों में रियायती पास अनिवार्य रूप से मान्य होंगे।

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परिवहन विभाग का सख्त आदेश

परिवहन आयुक्त की ओर से प्रदेश के सभी जिला परिवहन अधिकारियों (DTO) को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य निजी बस सेवा को सार्वजनिक परिवहन की तरह ही जवाबदेह और नागरिक-अनुकूल बनाना है।

आदेश की मुख्य बातें

अब छात्र पास, वरिष्ठ नागरिक पास और दिव्यांग पास धारकों को निजी बसों में यात्रा करने से मना नहीं किया जा सकता। यदि कोई संचालक इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो विभाग बिना किसी देरी के उस बस का रूट परमिट रद्द करने की कार्रवाई करेगा। विभाग ने अधिकारियों को औचक निरीक्षण करने और यात्रियों की शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेने के निर्देश दिए हैं।

1750 निजी बसें और स्टेज कैरिज स्कीम 2016

हरियाणा में वर्तमान में लगभग 1750 निजी बसें संचालित हो रही हैं। ये सभी बसें स्टेज कैरिज स्कीम 2016 की शर्तों के तहत आती हैं। सरकार ने साफ किया है कि इन बसों को परमिट इसी शर्त पर दिया गया था कि वे हरियाणा रोडवेज की तरह ही सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

विभाग के अनुसार, यह कोई नया नियम नहीं है बल्कि 2017 में जारी आदेशों का कड़ाई से पालन है। निजी बस संचालकों को यह स्पष्ट कर दिया गया है कि पास की सुविधा देना उनके परमिट की एक अनिवार्य कानूनी शर्त है, न कि कोई स्वैच्छिक सेवा। इसके बदले उन्हें किसी अलग सरकारी सब्सिडी का दावा करने का अधिकार नहीं है।

क्यों पड़ी सख्त कदम की जरूरत?

पिछले काफी समय से परिवहन विभाग और सरकार के पास छात्रों और सामाजिक संगठनों की ओर से शिकायतें आ रही थीं। पास देखते ही बस चालक बस नहीं रोकते थे या छात्रों को बीच रास्ते में उतार दिया जाता था। कई बार बस में जगह होने के बावजूद रियायती श्रेणी के यात्रियों को प्रवेश नहीं दिया जाता था। निजी संचालक केवल नकद किराया देने वाले यात्रियों को प्राथमिकता दे रहे थे। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के निर्देशों पर यह कार्रवाई की गई है।

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