Haryana News: हरियाणा की राजनीति इन दिनों काफी गर्माई हुई है। एक ओर राज्य में नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है, वहीं दूसरी ओर भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। रेखा शर्मा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल और उनके बड़े बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई को लेकर की गई टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
इस बयान के बाद चौधरी भजनलाल परिवार और उनके समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन बिश्नोई ने रेखा शर्मा को कानूनी नोटिस भेज दिया है। वहीं कुलदीप बिश्नोई भी लगातार बयान देकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कुलदीप बिश्नोई भाजपा से दूरी बना सकते हैं।
Haryana News: हरियाणा वालों की मौज! गर्मियों की छुट्टियों के लिए रेलवे ने चलाई 4 स्पेशल ट्रेनें, देखें शेड्यूल
भजनलाल परिवार का हरियाणा राजनीति में बड़ा प्रभाव
चौधरी भजनलाल हरियाणा की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। वे नौ बार आदमपुर से विधायक बने और तीन बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। इसके अलावा वे तीन बार लोकसभा सांसद और दो बार केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे।
उनके बड़े बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई चार बार कालका से विधायक रह चुके हैं और फिलहाल पंचकूला से कांग्रेस विधायक हैं। वहीं कुलदीप बिश्नोई भी हरियाणा की राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं। वे चार बार आदमपुर से विधायक रह चुके हैं और हिसार तथा भिवानी से सांसद भी चुने जा चुके हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कुलदीप बिश्नोई का प्रभाव केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान और पंजाब के कुछ इलाकों में भी उनका मजबूत जनाधार माना जाता है।
3 जून पर टिकी सबकी नजर
सूत्रों के अनुसार कुलदीप बिश्नोई इस समय विदेश दौरे पर हैं और अगले सप्ताह भारत लौट सकते हैं। वापसी के बाद वे अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि 3 जून को चौधरी भजनलाल की पुण्यतिथि पर वे कोई बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं।
भजनलाल समर्थकों में जिस तरह नाराजगी बढ़ रही है, उसे देखते हुए राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि कुलदीप बिश्नोई भाजपा में बने रहेंगे या कोई नया रास्ता चुनेंगे।
कुलदीप बिश्नोई के सामने कौन-कौन से विकल्प?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक कुलदीप बिश्नोई के सामने फिलहाल तीन बड़े विकल्प मौजूद हैं। पहला विकल्प यह है कि वे भाजपा में रहकर ही अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखें। हालांकि कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी और सम्मान से जुड़े मुद्दे इस राह को मुश्किल बना सकते हैं।
दूसरा विकल्प कांग्रेस में वापसी का माना जा रहा है। लेकिन हरियाणा कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का मजबूत प्रभाव होने के कारण वहां कुलदीप बिश्नोई के लिए स्वतंत्र राजनीतिक जगह सीमित मानी जा रही है। तीसरा और सबसे चर्चित विकल्प यह है कि वे अपनी अलग राजनीतिक पार्टी या क्षेत्रीय मोर्चा तैयार करें। माना जा रहा है कि यदि ऐसा होता है तो हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
भाजपा को हो सकता है नुकसान
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कुलदीप बिश्नोई भाजपा से अलग होते हैं तो इसका असर केवल आदमपुर या हिसार तक सीमित नहीं रहेगा। हरियाणा में कई सीटों पर जीत-हार का अंतर बहुत कम वोटों का होता है।
ऐसे में भजनलाल और कुलदीप समर्थक वोट बैंक के अलग होने से भाजपा को कई सीटों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। खासकर गैर-जाट वोट बैंक वाले इलाकों में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। अब सभी की नजर 3 जून पर टिकी हुई है, जब कुलदीप बिश्नोई अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।










