Haryana News: हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री और जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। हिसार में पुलिस के सीआईए (CIA) स्टाफ के साथ हुए हाई-प्रोफाइल विवाद के मामले में अदालत ने फिलहाल सीधे तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश देने से मना कर दिया है। जस्टिस ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पास अन्य कानूनी विकल्प मौजूद हैं।
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हाईकोर्ट का फैसला
दुष्यंत चौटाला ने अपनी याचिका में मांग की थी कि सीआईए स्टाफ के साथ हुए विवाद की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI), चंडीगढ़ पुलिस या पंजाब पुलिस जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही, उन्होंने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की भी गुहार लगाई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए याचिकाकर्ता के पास हिसार की न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (JMIC) अदालत में जाने का अधिकार है। चूंकि मामले की जांच अभी हरियाणा पुलिस कर रही है, इसलिए हाईकोर्ट ने जांच में हस्तक्षेप करने या सीधी एफआईआर के आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) को दोनों पक्षों की शिकायतों पर एक संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी (GJU) से शुरू हुआ हंगामा
इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा 16 अप्रैल 2026 को लिखी गई थी। हिसार की गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी में जेजेपी नेता दिग्विजय चौटाला अपने समर्थकों के साथ कुलपति (VC) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी का गेट तोड़ने का प्रयास किया, जिसके बाद प्रशासन की शिकायत पर दिग्विजय सहित 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और कुछ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
सब्जी मंडी पुल पर ‘पिस्तौल’ और ‘टकराव’ का ड्रामा
असली विवाद 17 अप्रैल को तब हुआ जब दुष्यंत चौटाला अपने समर्थकों के साथ ‘सामूहिक गिरफ्तारी’ देने सिटी थाने की ओर बढ़ रहे थे। हिसार के सब्जी मंडी पुल के पास उनका सामना सीआईए स्टाफ से हुआ।
पूर्व डिप्टी सीएम का दावा है कि सिविल ड्रेस में मौजूद सीआईए इंचार्ज पवन कुमार ने एक निजी गाड़ी उनके काफिले के आगे लगा दी और उन पर पिस्तौल तानी। उन्होंने पुलिस पर दुर्व्यवहार और जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर की मांग की थी।
पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस के अनुसार, दुष्यंत के काफिले में शामिल एक गाड़ी लापरवाही से चलाई जा रही थी, जिसने पुलिस वाहन को टक्कर मारने की कोशिश की। सीआईए इंचार्ज ने केवल सुरक्षा कारणों से गाड़ी को रुकवाया और चेतावनी दी थी।









