Haryana News: हरियाणा CM नायब सैनी की सुरक्षा में चूक, अंधेरे रास्ते से गुजरा काफिला

रेवाड़ी में CM नायब सैनी का काफिला 1.5 किलोमीटर तक अंधेरे में गुजरा। वीडियो वायरल होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे और विधायक ने अधिकारियों से जवाब मांगा।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 7, 2026

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Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सुरक्षा में एक बड़ी और गंभीर चूक का मामला सामने आया है। रेवाड़ी शहर के एक पॉश इलाके में शनिवार देर रात मुख्यमंत्री का काफिला करीब डेढ़ किलोमीटर तक बिना स्ट्रीट लाइट के घुप अंधेरे के बीच से गुजरा। यह घटना न केवल वीवीआईपी सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है, बल्कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की भारी लापरवाही को भी उजागर करती है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है और स्थानीय विधायक ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जवाब तलब किया है।

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हाफ मैराथन में शामिल होने पहुंचे थे मुख्यमंत्री

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, रविवार को रेवाड़ी में एक भव्य हाफ मैराथन का आयोजन किया गया था। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार की देर रात ही रेवाड़ी पहुंच गए थे। तय कार्यक्रम के मुताबिक, वह शहर की अमंगनी सोसाइटी में रात्रि भोज के लिए जा रहे थे। जब उनका काफिला राजेश पायलट चौक से अमंगनी सोसाइटी की ओर बढ़ रहा था, तो रास्ते में सड़क पर लगी सभी स्ट्रीट लाइटें पूरी तरह बंद थीं। इस अचानक आई स्थिति ने कुछ पलों के लिए सीएम सुरक्षा में तैनात अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की सांसे भी फुला दीं।

डेढ़ किलोमीटर तक अंधेरे में रहा वीवीआईपी काफिला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के आने और वापस जाने के दौरान लगभग डेढ़ किलोमीटर के पूरे सफर में सड़क पर अंधेरा छाया रहा। इसी दौरान किसी स्थानीय नागरिक ने इस पूरी स्थिति का वीडियो बना लिया और इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि जिस रास्ते से प्रदेश के मुखिया गुजर रहे हों, यदि वहां इस तरह की सुरक्षा चूक हो सकती है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

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महीनों से खराब पड़ी हैं स्ट्रीट लाइटें

यह मामला केवल एक रात की तकनीकी खराबी का नहीं है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का एक लंबा इतिहास है। जिस सड़क का यह वीडियो वायरल हुआ है, वह एक बेहद पॉश इलाका माना जाता है। यहां कई नामी सोसाइटियां और आधुनिक सेक्टर स्थित हैं, जहां प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छूती हैं। यह सड़क प्रशासनिक रूप से दो हिस्सों में बंटी हुई है—इसका आधा हिस्सा नगर परिषद के अंतर्गत आता है और दूसरा आधा हिस्सा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर लगी स्ट्रीट लाइटें पिछले कई महीनों से खराब पड़ी हैं। निवासियों ने इसकी शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की थी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।

नगर परिषद के खर्च और दावों की खुली पोल

हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद शहर में स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव (मेंटेनेंस) पर हर साल 30 लाख रुपये से अधिक की बड़ी राशि खर्च करती है। इसके बावजूद पॉश इलाकों में इस तरह की बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहना भ्रष्टाचार और लचर प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलता है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया है। इस बड़ी चूक के बाद अब प्रशासन पर भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने का भारी दबाव बन गया है।

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