Haryana News: हरियाणा में कांग्रेस पार्टी के संगठन को मजबूत करने और आगामी रणनीतियों पर चर्चा के लिए कैथल के ढांड रोड स्थित वृंदावन पैलेस में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत प्रदेश प्रभारी संजय दत्त और प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। इस दौरान पार्टी नेताओं के बीच की आपसी खींचतान और तीखे तेवर भी खुलकर सामने आए।
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2029 का चुनाव ‘करो या मरो’ की लड़ाई: संजय दत्त
बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी संजय दत्त ने पार्टी के भीतर अनुशासन और जमीनी मेहनत पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा “साल 2029 हमारे लिए करो या मरो की लड़ाई है। हरियाणा में हम पिछले तीन चुनावों से हार रहे हैं, इसका कोई तो कारण है और कहीं न कहीं हमारी ही कमी रही है। यदि 2029 में चुनाव नहीं जीते, तो जिस तरह कांग्रेस के हाथ से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल निकल गए, उसी तरह हरियाणा भी हमारे हाथ से निकल जाएगा।”
उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं से टिकट की आपसी लड़ाई को छोड़कर पूरी तरह से बूथ लेवल तक काम करने की अपील की, ताकि सत्ता हासिल की जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 35 साल से कांग्रेस पूंडरी में विधायक नहीं बना सकी है, इसलिए वहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
नेताओं के बीच आपसी खींचतान और विरोधाभास
इस संवाद कार्यक्रम के दौरान पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और मतभेद भी खुलकर सामने आए:
विकास सहारन का बयान: पूंडरी से जुड़े नेता विकास सहारन ने मंच से सवाल उठाते हुए कहा कि आज कांग्रेस पार्टी दो हिस्सों में बंटती नजर आ रही है—एक कांग्रेस जो जमीन पर संघर्ष कर रही है और दूसरी जो हवा में है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक घरानों को जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं से दिक्कत है।
राव नरेंद्र सिंह की सफाई: दोनों नेताओं के बीच सामने आए विरोधाभास पर प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि कांग्रेस में कोई ‘राजघराना’ नहीं होता। दोनों परिवार लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं।
आदित्य सुरजेवाला की दो टूक: कलायत विधानसभा के कार्यकर्ताओं से संवाद के दौरान कैथल विधायक आदित्य सुरजेवाला ने कड़े शब्दों में कहा कि कुछ साथी ऐसे हैं जो जानबूझकर कांग्रेस का ‘बेड़ा गर्क’ करने में लगे हैं। उनके इस बयान के दौरान माहौल काफी गरमा गया, जिसके बाद वे वहां से चले गए।
इस बैठक से यह साफ हो गया है कि जहां एक तरफ कांग्रेस आगामी चुनावों को लेकर खुद को जमीन पर मजबूत करने की बात कह रही है, वहीं पार्टी के भीतर चल रही अंतर्कलह और गुटबाजी नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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