Haryana News: हरियाणा की तहसीलों में लगा ब्रेक, डिजिटल सिस्टम के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल

Haryana News: हरियाणा में डिजिटल राजस्व प्रणाली को लेकर विवाद गहरा गया है। पटवारी और कानूनगो लगातार हड़ताल पर हैं, जिससे तहसीलों में जमीन से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि नए पोर्टल में तकनीकी खामियां हैं, जबकि सरकार व्यवस्था को सुचारू बता रही है।

हरियाणा की तहसीलों में लगा ब्रेक

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 22, 2026

Haryana News: हरियाणा में राजस्व विभाग की नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पटवारी और कानूनगो अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे, जिससे प्रदेश की कई तहसीलों में कामकाज प्रभावित हुआ। जमीन से जुड़े इंतकाल, रिकॉर्ड अपडेट और अन्य राजस्व कार्यों में देरी होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने राजस्व कार्यों के लिए नए सॉफ्टवेयर और डिजिटल पोर्टल तो लागू कर दिए हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। कई कर्मचारियों के पास पुराने और खराब टैबलेट हैं, जिनसे नए सिस्टम पर काम करना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा नए पोर्टल में तकनीकी खामियां भी सामने आ रही हैं, जिससे काम की गति प्रभावित हो रही है।

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तकनीकी समस्याओं से बढ़ी कर्मचारियों की मुश्किलें

पटवारियों और कानूनगो का कहना है कि विभागीय स्तर पर नए सॉफ्टवेयर को पूरी तरह सक्षम बताया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। कर्मचारियों के मुताबिक पोर्टल में कई तकनीकी त्रुटियां हैं, जिनकी वजह से रिकॉर्ड तैयार करने और डेटा अपडेट करने में दिक्कत हो रही है।

उनका दावा है कि कई मामलों में गलतियां सामने आ रही हैं, जिससे भविष्य में राजस्व रिकॉर्ड को लेकर विवाद बढ़ सकते हैं। इसी कारण कर्मचारी सरकार के सामने ऐसे मामलों को रखने की तैयारी कर रहे हैं, जहां तकनीकी खामियों की वजह से दस्तावेजों में गड़बड़ी हुई है।

नए सिस्टम से बढ़ा लोगों का खर्च

नई डिजिटल व्यवस्था का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों पर भी इसका आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कैथल जिले में सामने आए एक मामले के अनुसार, पहले जमीन के इंतकाल की प्रक्रिया एक पेज में पूरी हो जाती थी और इसका खर्च करीब 25 रुपये आता था।

लेकिन नए सॉफ्टवेयर के लागू होने के बाद उसी प्रक्रिया के लिए 179 पेज तक प्रिंट कराने पड़ रहे हैं। इससे संबंधित व्यक्ति का खर्च बढ़कर लगभग 4,475 रुपये तक पहुंच गया। कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल सुधारों का मकसद प्रक्रिया को आसान और सस्ता बनाना होता है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

एसोसिएशन ने सरकार के सामने रखी मांगें

पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन का कहना है कि यदि सरकार को लगता है कि नया सॉफ्टवेयर पूरी तरह सही तरीके से काम कर रहा है, तो हर जिले से ऐसे 25-25 मामलों की जांच करवाई जाए जिनमें तकनीकी गड़बड़ियां सामने आई हैं। इससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। एसोसिएशन ने मांग की है कि पोर्टल को अधिक सरल बनाया जाए और उसमें मौजूद तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर किया जाए ताकि कर्मचारियों और आम जनता दोनों को राहत मिल सके।

फसल सर्वे और तकनीकी सुविधाओं में सुधार की मांग

हड़ताली कर्मचारियों ने डिजिटल क्रॉप सर्वे सिस्टम में भी बदलाव की मांग उठाई है। उनका कहना है कि मौजूदा 20 मीटर की सर्वे रेंज व्यावहारिक नहीं है और खेतों में सही सर्वेक्षण करने में परेशानी होती है। इसलिए इसे बढ़ाकर 150 मीटर किया जाना चाहिए। इसके अलावा बेहतर गुणवत्ता वाले टैबलेट, आधुनिक तकनीकी उपकरण, रेवेन्यू हरियाणा पोर्टल को सरल बनाने, बायर डिटेल की ऑटो-फिल सुविधा शुरू करने और भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को दूर करने की भी मांग की गई है।

आम जनता पर बढ़ रहा असर

तहसीलों में कामकाज प्रभावित होने के कारण जमीन खरीद-बिक्री, इंतकाल और अन्य राजस्व सेवाओं से जुड़े हजारों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। कर्मचारी संगठन और सरकार के बीच बातचीत से ही इस गतिरोध के खत्म होने की उम्मीद है।

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