Haryana News: हरियाणा में सफाई कर्मचारियों का आंदोलन अब बेहद उग्र रूप ले चुका है और हड़ताल का 28वां दिन राज्यभर में बढ़ते टकराव, हिंसक घटनाओं और चरमराई स्वच्छता व्यवस्था का गवाह बन रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों से लगातार मिल रही खबरों के अनुसार, वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने के दौरान प्रशासन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच तीखी झड़पें हो रही हैं। आम जनता की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं, जबकि सरकार और कर्मचारियों के बीच गतिरोध अभी भी बरकरार है।
कैथल और जींद में टकराव, जीप के शीशे टूटे
आंदोलन के दौरान बिगड़ते हालातों की बानगी कैथल के सीवन क्षेत्र में देखने को मिली, जहां सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करके लौट रहे नगरपालिका अधिकारियों की सरकारी जीप पर कथित तौर पर कस्सी से हमला कर दिया गया। इस हमले में जीप का पिछला शीशा पूरी तरह टूट गया और वाहन में सवार कनिष्ठ अभियंता तथा लिपिक बाल-बाल बच गए।
वहीं, जींद में स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब पिछले चार दिनों से बंद पड़े कूड़े के उठान को शुरू करवाने के लिए ठेकेदार के कर्मचारी पहुंचे। हड़तालियों ने इसका कड़ा विरोध किया, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच तीखी हाथापाई की नौबत आ गई।
हिसार में पुलिस से भिड़ंत और फतेहाबाद में सुरक्षा के बीच कार्य
हिसार नगर निगम के 667 सफाई कर्मचारी लगातार हड़ताल पर डटे हुए हैं। मंगलवार को जब अर्बन एस्टेट और सेक्टर 9-11 में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कचरा उठान कराया जा रहा था, तब हड़तालियों ने इसका जोरदार विरोध किया। इस दौरान पुलिस और कर्मचारियों के बीच हुई तीखी झड़प में पांच पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें आईं और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इसके विपरीत, फतेहाबाद में नगर परिषद ने भारी पुलिस सुरक्षा और 15 वाहनों के बेड़े के साथ लगभग 150 टन कचरा उठवाया, हालांकि कार्यालय में कूड़ा फेंकने के मामले में 15 कर्मियों के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
बरसात और कचरे के ढेरों से बदतर होते हालात
हड़ताल के लंबे खिंचने और बारिश के मौसम ने मिलकर आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। यमुनानगर में लगातार हो रही बारिश के कारण डंपिंग प्वाइंटों पर जमा कचरा बहकर गलियों और रिहायशी मोहल्लों तक पहुंच गया है। पानीपत के मुख्य बाजार में कचरा डाले जाने से दुकानदारों में भारी रोष देखा गया, हालांकि निजी एजेंसियों ने वहां से लगभग 300 टन कचरा उठाया है। भिवानी में घर-घर कचरा उठान पूरी तरह ठप है, जबकि अंबाला कैंट में 250 कर्मचारियों की हड़ताल के आगे प्रशासनिक व्यवस्थाएं बौनी साबित हो रही हैं। झज्जर में भी सफाई के दावे कुछ ही दिनों में धड़ाम हो गए और पुनः कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग गए, जिसके विरोध में कर्मचारियों ने सरकार का पुतला फूंककर शवयात्रा निकाली।
बढ़ती अव्यवस्था और आम जनता की परेशानियों को देखते हुए अब कई सामाजिक संगठन भी हड़ताल के तौर-तरीकों पर सवाल उठाने लगे हैं। उनका कहना है कि अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक रूप से आंदोलन करना हर कर्मचारी का अधिकार है, लेकिन इसके साथ ही आमजन की बुनियादी सुविधाओं और सार्वजनिक स्वच्छता का ध्यान रखना भी बेहद आवश्यक है।
Haryana News: हरियाणा में बदलेगी जेल की रसोई की तस्वीर, अंबाला से शुरू होगी










