Haryana News: हरियाणा के चरखी दादरी जिले में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश ने भीषण गर्मी और सूखे से जूझ रहे किसानों के चेहरों पर एक बार फिर मुस्कान लौटा दी है। लंबे समय से आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे अन्नदाताओं के लिए यह मानसूनी फुहारें किसी सुनहरे वरदान से कम नहीं हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सूखने की कगार पर पहुंच चुकी खरीफ फसलों के लिए यह वर्षा रामबाण साबित होगी। इस अनुकूल मौसम से न केवल फसलों का विकास तेज होगा, बल्कि धान की रोपाई और बाजरे की बुआई के कार्यों में भी तेजी आएगी।
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फसलों के लिए संजीवनी बनी बारिश
चरखी दादरी में मानसून के सक्रिय होने से खेतों की मिट्टी में पर्याप्त नमी आ गई है, जो इस समय फसलों के लिए बेहद जरूरी थी:
अंकुरण और बढ़वार में तेजी: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद खेतों में बनी नमी से पछेती फसलों के बीजों का अंकुरण बेहतर होगा। वहीं, पहले से खेतों में खड़ी कपास और बाजरे की फसलों की ग्रोथ (बढ़वार) अब दोगुनी रफ्तार से होगी।
31 जुलाई तक बुआई का मौका: कृषि उप निदेशक डॉ. रवींद्र जाखड़ ने बताया कि जिन किसानों की धान की रोपाई बची हुई है, वे इस नमी का फायदा उठाकर जुलाई के अंत तक रोपाई पूरी कर लें। इसके अलावा, किसान 31 जुलाई तक बाजरा की पछेती किस्म ‘एचएचबी-67’ की बुआई भी आसानी से कर सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, क्षेत्र में 25 जुलाई तक रुक-रुक कर बारिश होने की प्रबल संभावना है।
निराई-गुड़ाई पर जोर: विभाग ने किसानों को सचेत किया है कि बारिश के बाद खेतों में खरपतवार (नदी-नालों और अनचाही घास) तेजी से पनपेगी। किसान केमिकल या खरपतवारनाशी दवाओं का अंधाधुंध प्रयोग करने के बजाय समय पर पारंपरिक तरीके से निराई-गुड़ाई करें।
खेतों में बढ़ेगी यूरिया की खपत
बरसात के बाद जैसे ही खेतों से अतिरिक्त पानी सूखेगा, जिले में यूरिया खाद की मांग और खपत में भारी उछाल आने की उम्मीद है। कपास और बाजरे जैसी मुख्य फसलों में इस समय यूरिया देना बेहद फायदेमंद माना जाता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने खाद के सही उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन किसानों की बाजरे की फसल 20 से 25 दिन की हो चुकी है और कपास (नरमा) की फसल दो महीने की अवधि पार कर चुकी है, वे प्रति एकड़ 25 से 30 किलोग्राम यूरिया का छिड़काव कर सकते हैं। हालांकि, ग्वार की फसल उगाने वाले किसानों को इस समय किसी भी प्रकार की खाद देने की आवश्यकता नहीं है। राहत की बात यह है कि जिले में यूरिया का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और अधिकांश किसानों ने एहतियातन बारिश से पहले ही यूरिया का इंतजाम कर लिया था।
यूरिया का स्टॉक फुल, लेकिन संकट में किसान
भले ही यूरिया को लेकर जिले में कोई हाहाकार न हो, लेकिन डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) खाद की भारी किल्लत ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। धान की बची हुई रोपाई और पछेती बाजरे की बुआई के लिए डीएपी बेहद अनिवार्य है, लेकिन बिक्री केंद्रों पर यह उपलब्ध नहीं है।
उदाहरण के तौर पर, चरखी दादरी शहर की पुरानी अनाज मंडी स्थित ‘दा जमींदारा को-ऑपरेटिव सोसायटी’ का स्टॉक बेहद असंतुलित है:
यूरिया का स्टॉक: 1170 बैग उपलब्ध
अन्य खादें: एनपीके (NPK) के 350 बैग और टीएसपी (TSP) के 280 बैग मौजूद हैं।
डीएपी की स्थिति: पिछले कई दिनों से स्टॉक पूरी तरह शून्य (खत्म) है।
सोसायटियों और निजी केंद्रों से डीएपी गायब होने के कारण किसान खाद के लिए भटकने को मजबूर हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जुलाई का महीना खत्म होने से पहले जिले में डीएपी की रैक लगवाई जाए, ताकि मानसून के इस सीजन का पूरा लाभ उठाया जा सके।
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