Haryana News: अंबाला में दहलाने की साजिश, ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ की बम धमकी, 6 जून की डेडलाइन से हड़कंप

अंबाला में एक बार फिर सरकारी संस्थानों, कोर्ट और रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया है। 'खालिस्तान नेशनल आर्मी' के नाम से भेजे गए इस धमकी भरे ईमेल में 6 जून की डेडलाइन तय की गई है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 2, 2026

Haryana News: हरियाणा के अंबाला शहर में एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। इस बार आतंकियों की ओर से अंबाला को निशाना बनाने की साजिश रची गई है। ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ नामक एक संगठन के नाम से आए एक धमकी भरे ईमेल ने पूरे शहर में दहशत फैला दी है। इस ईमेल में अंबाला शहर नगर निगम, अंबाला कोर्ट और अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। यह धमकी ऐसे समय पर आई है जब देश के कई अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के संदिग्ध ईमेल के जरिए धमकियां मिलने का सिलसिला जारी है।

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6 जून की डेडलाइन और सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती

धमकी भरे मेल में स्पष्ट तौर पर 6 जून की तारीख को डेडलाइन के रूप में निर्धारित किया गया है, जिसके बाद से ही प्रशासन और खुफिया तंत्र के कान खड़े हो गए हैं। हालांकि, सरकारी संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकियां अंबाला के लिए नई नहीं हैं, लेकिन हर बार बढ़ती इनकी गंभीरता ने जनता के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। ईमेल मिलने के तुरंत बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में उच्च स्तरीय बैठकें बुलाकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई।

पुलिस की मुस्तैदी बनाम खोखले दावे

पुलिस प्रशासन ने दावा किया है कि कोर्ट परिसर, नगर निगम और रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की सुरक्षा की जिम्मेदारी जीआरपी को दी गई है, जबकि नगर निगम और कोर्ट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके की घेराबंदी की जा रही है और संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है।

हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि पुलिस अब तक इन ईमेल्स के पीछे के असली मास्टरमाइंड को पकड़ने में क्यों नाकाम रही है? बार-बार मिल रही इन धमकियों के बाद भी पुलिस का वही ‘जांच चल रही है’ वाला पुराना जवाब आम जनता के भरोसे को कमजोर कर रहा है। लोगों के मन में अब भी यह सवाल है कि क्या पुलिस के ये दावे केवल कागजी हैं या वाकई सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं?

तकनीकी जांच और खुफिया एजेंसियों की भूमिका

इस मामले को लेकर राज्य और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से लगातार संपर्क साधा जा रहा है। पुलिस की टेक्निकल टीम आईपी एड्रेस और मेल के सोर्स का पता लगाने में जुटी है, जो इस वक्त उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 6 जून की तारीख नजदीक है, इसलिए पुलिस के लिए यह समय के खिलाफ एक दौड़ की तरह है।

यह घटना दर्शाती है कि अंबाला जैसे संवेदनशील इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक बनाने की कितनी आवश्यकता है। केवल संस्थानों को सील कर देना या पुलिस बल तैनात करना ही काफी नहीं है, बल्कि इन धमकियों के पीछे के ‘डिजिटल आतंक’ की जड़ तक पहुंचना अब अनिवार्य हो गया है। जब तक आरोपी सलाखों के पीछे नहीं होते, तब तक अंबाला के निवासियों की चिंता कम होना मुश्किल है।

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