Haryana News: हरियाणा में OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला, शादी से नहीं मिलेगा लाभ, हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट

हरियाणा में OBC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि शादी के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन सवाल यह है कि इस फैसले का असर किन महिलाओं पर पड़ेगा और क्या इससे सरकारी नौकरियों में आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी, पूरी रिपोर्ट में जानिए

हरियाणा में OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 3, 2026

Haryana News: हरियाणा में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण नीति को लेकर एक अहम कानूनी स्थिति सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि दूसरे राज्य से विवाह कर हरियाणा आने वाली महिलाओं को ओबीसी (OBC/BC) आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।

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अदालत का स्पष्ट आदेश

हाईकोर्ट ने अपने हालिया निर्णय में साफ कहा है कि आरक्षण का अधिकार व्यक्ति को उसके जन्म और मूल निवास के आधार पर मिलता है, न कि विवाह के आधार पर। इसका मतलब यह है कि यदि कोई महिला किसी अन्य राज्य जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश या पंजाब की ओबीसी श्रेणी से आती है और बाद में हरियाणा के किसी परिवार में विवाह कर लेती है, तो भी उसे हरियाणा में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।

आरक्षण के नियमों में क्या है मुख्य आधार?

इस फैसले में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट किया गया है:

  • आरक्षण का निर्धारण व्यक्ति के पिता की जाति और मूल निवास के आधार पर किया जाएगा।
  • विवाह के बाद महिला की जाति या श्रेणी अपने आप नहीं बदलती।
  • पति की जाति के आधार पर महिला को नई आरक्षण श्रेणी का अधिकार नहीं मिलता।
  • हर राज्य की OBC सूची अलग-अलग होती है, इसलिए एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरण होने पर आरक्षण लाभ समाप्त हो जाता है।

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हरियाणा में सामान्य श्रेणी में होंगे आवेदन

इस निर्णय के अनुसार, ऐसी महिलाएं जो दूसरे राज्य से विवाह करके हरियाणा आई हैं, वे अब राज्य की OBC/BC श्रेणी के तहत आवेदन नहीं कर पाएंगी। उन्हें सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य श्रेणी (General Category) के अंतर्गत ही आवेदन करना होगा।

फैसले के पीछे कानूनी और सामाजिक कारण

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विवाह के आधार पर आरक्षण का लाभ दिया जाने लगे, तो इससे राज्य के मूल निवासियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हरियाणा सरकार की आरक्षण नीति का उद्देश्य उन लोगों को लाभ देना है जिन्होंने राज्य के भीतर सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन का सामना किया है।

संवैधानिक दृष्टिकोण

भारत के संविधान के अनुसार, प्रत्येक राज्य की पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची अलग होती है। यही कारण है कि एक राज्य में मान्य जाति दूसरे राज्य में आरक्षण के लिए मान्य नहीं होती। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ केवल वास्तविक पात्र और स्थानीय समुदायों तक ही सीमित रहे।

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