Haryana News: हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग ने टीबी (तपेदिक) जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ जंग में आधुनिक तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान (चरण-2)’ के तहत महज 104 दिनों के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से रिकॉर्ड 25,666 नए टीबी मरीजों की पहचान की गई है। इस महाअभियान के दौरान पूरे प्रदेश में कुल 4,73,197 लोगों की सघन स्वास्थ्य जांच की गई। इस तकनीक-आधारित पहल से न सिर्फ मरीजों की समय पर पहचान हो रही है, बल्कि बीमारी को फैलने से रोकने में भी बड़ी सफलता मिल रही है।
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रिकॉर्ड स्तर पर लगाए गए स्वास्थ्य शिविर
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य टीबी के मरीजों की शुरुआती चरण में ही पहचान करना और तुरंत उनका मुफ्त इलाज शुरू करना है। इसके लिए विभाग ने मैदानी स्तर पर विशाल बुनियादी ढांचा तैयार किया:
हजारों शिविरों का आयोजन: 24 मार्च से 5 जुलाई तक प्रदेशभर में कुल 3,914 विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए गए।
उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर फोकस: इनमें से 2,854 शिविर केवल उन क्षेत्रों (High-risk areas) में लगाए गए जहां टीबी फैलने की संभावना सबसे अधिक थी।
सघन जांच प्रक्रिया: इन शिविरों और स्क्रीनिंग के माध्यम से 2,25,321 चेस्ट एक्सरे किए गए और लगभग 1.25 लाख एनएएटी (NAAT – Nucleic Acid Amplification Test) जांचें की गईं, जिससे छिपे हुए मरीजों को ढूंढने में मदद मिली।
टीबी से जंग में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ बना ब्रह्मास्त्र
इस अभियान की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसमें इस्तेमाल की जा रही अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक है। पारंपरिक तरीकों के मुकाबले एआई ने जांच की गति को कई गुना बढ़ा दिया है, स्वास्थ्य कर्मी अब भारी-भरकम मशीनों की जगह हाथ में आ जाने वाली (Handheld) एआई-सक्षम एक्सरे मशीनें लेकर दूर-दराज के गांवों और ढाणियों तक पहुंच रहे हैं। ये मशीनें मौके पर ही फेफड़ों की डिजिटल जांच कर टीबी के लक्षणों को तुरंत पकड़ लेती हैं।
खांसी की आवाज से पहचान: अभियान में ‘कफ अगेंस्ट टीबी’ (Cough Against TB) नामक एक खास मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग किया जा रहा है। यह ऐप मरीज की खांसी की आवाज का विश्लेषण (Voice Analysis) करता है और एआई एल्गोरिदम की मदद से तुरंत बता देता है कि संबंधित व्यक्ति को टीबी होने की कितनी संभावना है।
23 हजार से अधिक किट वितरित
इस बीमारी से पूरी तरह निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें केवल अस्पतालों या शिविरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे शहरी वार्डों और गांवों में घर-घर जाकर दस्तक दे रही हैं।
उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान
राज्य सरकार ने पूरे हरियाणा में 2,111 गांवों और शहरी वार्डों को ‘हाई-रिस्क जोन’ के रूप में चिह्नित किया है। इन चुनिंदा क्षेत्रों में विशेष मोबाइल वैन और स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें लगातार स्क्रीनिंग कर रही हैं।
इलाज के साथ पोषण भी जरूरी
चूंकि टीबी के इलाज में दवाओं के साथ-साथ बेहतर खान-पान और मजबूत इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) का होना अनिवार्य है, इसलिए सरकार मरीजों के पोषण का भी पूरा ख्याल रख रही है। विभाग द्वारा अब तक चिन्हित टीबी मरीजों को 23,962 विशेष पोषण किट (Nutrition Kits) मुफ्त वितरित की जा चुकी हैं, ताकि वे जल्द से जल्द इस बीमारी को हराकर स्वस्थ जीवन जी सकें।










