Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, बुजुर्गों को बिना झंझट मिलेगी पेंशन!

हरियाणा सरकार परिवार पहचान पत्र (PPP) में जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया को सरल बनाने जा रही है। अब जिन बुजुर्गों के पास उम्र साबित करने के लिए निर्धारित 5 दस्तावेज नहीं हैं

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 5, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के लाखों बुजुर्गों को एक बड़ी राहत प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वृद्धावस्था पेंशन पाने वाले लाभार्थियों के लिए परिवार पहचान पत्र (PPP) में जन्मतिथि का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया था, जिसके चलते कई ऐसे बुजुर्ग परेशान थे जिनके पास उम्र साबित करने के लिए निर्धारित पांच प्रमुख दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। अब सरकार इन बुजुर्गों की सुविधा के लिए नियमों में बदलाव कर एक वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है।

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उम्र सत्यापन का नया ‘वैकल्पिक’ फॉर्मूला

राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यदि किसी बुजुर्ग के पास जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, 2019 से पुराना वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट या पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जैसे दस्तावेज नहीं हैं, तो उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। सरकार अब एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है जिसके तहत फैमिली आईडी में दर्ज बुजुर्ग की बड़ी संतान (बेटा या बेटी) के जन्म प्रमाण-पत्र या शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर भी बुजुर्ग की उम्र का सत्यापन किया जा सकेगा।

इस नई व्यवस्था की शर्त केवल इतनी है कि बड़ी संतान का नाम फैमिली आईडी में दर्ज होना चाहिए और उसकी जन्मतिथि पूरी तरह से सत्यापित होनी चाहिए। यह कदम उन बुजुर्गों के लिए वरदान साबित होगा जो लंबी कागजी प्रक्रिया के कारण अपनी पेंशन कटने के डर में जी रहे थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश

परिवार पहचान पत्र के को-ऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि प्रदेश के किसी भी पात्र नागरिक की पेंशन नहीं काटी जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र लाभार्थियों को बिना किसी बाधा के सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहे।

विभाग इस बात पर काम कर रहा है कि दिसंबर 2026 तक सभी परिवारों की आईडी में सही डेटा अपडेट हो जाए। सरकार लाभार्थियों को नियमित रूप से मैसेज भेजकर सूचित कर रही है, ताकि वे 30 दिनों के भीतर अपने दस्तावेज अपलोड कर सकें। जिन बुजुर्गों के पास वैकल्पिक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए ही यह विशेष ‘संतान-आधारित सत्यापन’ प्रक्रिया लागू की जाएगी।

डिजिटल युग में पारदर्शिता और सुविधा का संतुलन

यह बदलाव सरकार के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है। हालांकि, तकनीक के इस दौर में वरिष्ठ नागरिकों को दस्तावेजों की जटिलता से बचाने के लिए सरकार का यह लचीला रुख सराहनीय है।

अब लाभार्थियों को दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि आपके पास निर्धारित पांच दस्तावेजों में से कुछ भी नहीं है, तो आप अपनी संतान के दस्तावेजों का उपयोग करके अपनी पात्रता सिद्ध कर सकेंगे। यह पहल न केवल बुजुर्गों का सम्मान सुनिश्चित करेगी, बल्कि उन्हें उनके हक की पेंशन से भी वंचित नहीं होने देगी। हरियाणा सरकार के इस फैसले से लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कुछ समय से पेंशन सत्यापन को लेकर असमंजस में थे।

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