Haryana News: बैंक घोटाले में CBI का बड़ा कदम, तीसरे IAS अधिकारी पर गिरी गाज

हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाते हुए सीबीआई ने करोड़ों रुपये के बैंक घोटाले में एक और बड़ी कार्रवाई की है।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 1, 2026

Haryana News: हरियाणा और प्रशासनिक गलियारों में आज एक बेहद सनसनीखेज घटनाक्रम देखने को मिला। करोड़ों रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप डागर को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी किसी सामान्य दिन नहीं, बल्कि उस दिन हुई जिस दिन आईएएस डागर अपनी लंबी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे थे। आमतौर पर रिटायरमेंट का दिन विदाई और सम्मान का प्रतीक होता है, लेकिन प्रदीप डागर के लिए यह दिन सीधे जेल की दहलीज तक ले जाने वाला साबित हुआ।

Haryana News: 22 घंटे बाद बोरवेल से बाहर आया निर्भय, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

जमानत सुनवाई से पहले सीबीआई का बड़ा ‘स्ट्राइक’

आईएएस प्रदीप डागर को सीबीआई की संभावित कार्रवाई का पहले से अंदेशा था। अपनी गिरफ्तारी को टालने के उद्देश्य से उन्होंने कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए याचिका दायर की थी। कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई शुरू होनी ही थी कि सीबीआई ने बेहद नाटकीय अंदाज में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने कोर्ट के बाहर या सुनवाई के दौरान किसी भी कानूनी दांव-पेच के लिए समय न देते हुए, ठीक सुनवाई से पहले ही शिकंजा कस दिया। इस त्वरित कार्रवाई ने प्रशासनिक और कानूनी हलकों में खलबली मचा दी है।

घोटाले की आंच में झुलसे तीसरे प्रशासनिक अधिकारी

यह बैंक घोटाला लंबे समय से जांच के घेरे में है। इसमें सरकारी फंड्स और बैंक लोन के बड़े पैमाने पर हेरफेर के आरोप लगे हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रदीप डागर के कार्यकाल के दौरान कई वित्तीय नियमों को दरकिनार किया गया और भारी अनियमितताएं बरती गईं। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डागर इस घोटाले में गिरफ्तार होने वाले तीसरे आईएएस अधिकारी हैं। उनसे पहले भी दो अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इसी मामले में जेल जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि घोटाले के तार कितने गहरे और रसूखदार लोगों से जुड़े हैं।

जांच में सहयोग न करने का आरोप

सीबीआई अधिकारियों ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रदीप डागर लंबे समय से जांच में असहयोग कर रहे थे। पूछताछ के दौरान कई सवालों के संतोषजनक जवाब न मिलने और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुट जाने के बाद एजेंसी ने यह कड़ा कदम उठाया। अब सीबीआई उन्हें रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी का मुख्य लक्ष्य यह पता लगाना है कि इस घोटाले के पीछे और कौन-कौन से रसूखदार नाम शामिल हैं और इस वित्तीय जाल को कैसे बुना गया था।

प्रदीप डागर की गिरफ्तारी ने नौकरशाही में एक बड़ा संदेश दिया है कि कानून का हाथ पद और प्रतिष्ठा से ऊपर है। सरकारी सेवा के अंतिम दिन हुई यह गिरफ्तारी न केवल डागर के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि उन तमाम अधिकारियों के लिए एक चेतावनी भी है जो अपने कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं में लिप्त रहे हैं। अब सबकी निगाहें सीबीआई की रिमांड पर टिकी हैं कि इस घोटाले की परतें आगे कितनी खुलती हैं और कौन-कौन से नए चेहरे जांच के दायरे में आते हैं।

Haryana News: खेत बचाओ अभियान का समापन, रेवाड़ी में शिवराज सिंह और नायब सैनी रहे मौजूद