Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने और व्यापार सुगमता को मजबूत करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने नियंत्रित क्षेत्रों में औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना के लिए अनुमति (Permission) प्रक्रिया को काफी सरल और पारदर्शी बना दिया है। अब निर्धारित शर्तों के तहत औद्योगिक प्रयोजन के लिए ऑनलाइन स्व-प्रमाणन (Online Self-Certification) के माध्यम से प्राप्त अनुमति को निदेशक की ओर से जारी आधिकारिक अनुमति के बराबर ही मान्यता दी जाएगी।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग द्वारा 6 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के तहत पंजाब अनुसूचित सड़क एवं नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 में संशोधन किया गया है। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल द्वारा जारी यह अधिसूचना राज्य में नए उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को तेज करने का काम करेगी।
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स्व-प्रमाणन से आसान होगी अनुमति प्रक्रिया

संशोधित नियमों के अनुसार औद्योगिक परियोजनाओं के लिए स्व-प्रमाणन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। आवेदक को मांगी गई आवश्यक जानकारी, दस्तावेज और संबंधित वचनबद्धता (Undertaking) स्वयं प्रमाणित करके ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। नियम 26ए के तहत स्व-प्रमाणन से दी गई जानकारी को ही औपचारिक आवेदन स्वीकार किया जाएगा। नियम 26ई के अनुसार, ऑनलाइन स्व-प्रमाणन के आधार पर मिली अनुमति को विभाग के निदेशक द्वारा जारी अनुमति के समान ही कानूनी दर्जा मिलेगा। ऐसे आवेदनों पर नियम 26बी, 26सी और 26डी के जटिल और समय लेने वाले प्रावधान लागू नहीं होंगे।
‘विकास योजना’ के अनुरूप होना आवश्यक
अधिसूचना में नियमों की स्पष्टता के लिए कुछ प्रमुख शब्दों को विशेष रूप से परिभाषित किया गया है, इसका तात्पर्य नियंत्रित क्षेत्र में भूमि या भवन के ऐसे इस्तेमाल से है, जो उस क्षेत्र की आधिकारिक विकास योजना (Development Plan) में निर्धारित प्रमुख भूमि उपयोग के अनुकूल हो। वह क्षेत्र जहां मास्टर प्लान या विकास योजना के प्रावधानों के अनुसार औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति दी गई हो। स्व-प्रमाणन व्यवस्था के तहत आवेदक को अपने द्वारा प्रस्तुत सभी तथ्यों और दस्तावेजों की सत्यता की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी।
गलत तथ्य देने पर शुरुआती तारीख से ही अमान्य होगी अनुमति

जहाँ एक तरफ सरकार ने उद्योगपतियों को स्व-प्रमाणन की बड़ी सुविधा दी है, वहीं दूसरी तरफ नियमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त जवाबदेही भी तय की है। यदि कोई आवेदक झूठे बयान, गलत जानकारी या किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाकर ऑनलाइन अनुमति प्राप्त करता है, तो ऐसी अनुमति को ‘प्रारंभ से ही शून्य’ (Void Ab Initio) माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अनुमति जारी होने की तिथि से ही पूरी तरह निष्प्रभावी और अमान्य हो जाएगी।
अन्य परियोजनाओं के लिए पुराने नियम रहेंगे लागू
अधिसूचना में यह पूरी तरह स्पष्ट किया गया है कि स्व-प्रमाणन (Self-Certification) की यह विशेष ढील केवल और केवल औद्योगिक प्रयोजनों के लिए है। अन्य गैर-औद्योगिक या व्यावसायिक मामलों में निदेशक द्वारा निर्धारित सभी पूर्व शर्तों और जांच-पड़ताल की प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही अनुमति प्रदान की जाएगी।
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