Haryana News: अवैध कब्जे पर हाईकोर्ट सख्त, किरायेदारी सिद्ध न होने पर मकान खाली करने का आदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि किरायेदारी साबित न होने और वैध अधिकार के बिना कब्जा होने पर मालिक को संपत्ति वापस लेने से रोका नहीं जा सकता।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 24, 2026

Haryana News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति यह साबित करने में असफल रहता है कि वह कानूनी रूप से संपत्ति का किरायेदार है, तो उसका कब्जा अवैध या अतिक्रमण के समान माना जाएगा। अदालत ने कहा कि केवल मालिक-किरायेदार का रिश्ता साबित न होने के आधार पर असली मालिक को उसकी संपत्ति का कब्जा वापस पाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

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मामला और कानूनी पृष्ठभूमि

यह फैसला जस्टिस परमोध गोयल की बेंच ने फरीदाबाद के गांव ऊंचागांव की एक आवासीय संपत्ति से जुड़ी 27 साल पुरानी नियमित दूसरी अपील पर सुनवाई करते हुए सुनाया।

मालिक का दावा: रघुबीर सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने 1986 में मकान बनवाने के बाद इसे उदय पाल को 25,0 रुपये मासिक किराये पर दिया था। अप्रैल 1990 से किराया देना बंद करने और बकाया 8,200 रुपये होने के बाद सितंबर 1993 में कानूनी नोटिस भेजकर किरायेदारी समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद कब्जा और हर्जाने के लिए मुकदमा दायर किया गया था।

प्रतिवादी का पक्ष: उदय पाल ने किरायेदारी से इनकार करते हुए दावा किया कि उसने लगभग नौ वर्ष पहले 150 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से संपत्ति रघुबीर सिंह से खरीद ली थी। उसने आधी रकम देकर कब्जा लेने और शेष राशि बाद में चुकाने की बात कही थी।

निचली अदालत से हाईकोर्ट तक का सफर

ट्रायल कोर्ट ने रघुबीर सिंह के संपत्ति का मालिक होने की बात तो स्वीकार की, लेकिन किरायेदारी साबित न होने के कारण बेदखली का मुकदमा खारिज कर दिया था। इसके बाद उदय पाल ने हाईकोर्ट में दलील दी कि जब किरायेदारी का संबंध ही साबित नहीं हुआ, तो बेदखली का केस भी खारिज होना चाहिए।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

हाईकोर्ट ने उदय पाल की दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि निचली अदालतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संपत्ति रघुबीर सिंह की है और उदय पाल यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि उसने कभी वह संपत्ति खरीदी थी।

जस्टिस गोयल ने स्पष्ट किया कि यदि उदय पाल को कानूनी रूप से किरायेदार नहीं माना जाता है, तो भी उस संपत्ति पर उसका कब्जा पूरी तरह अनधिकृत (Unauthorized) है। अदालत ने फैसला सुनाया कि यदि यह साबित हो जाता है कि प्रतिवादी बिना किसी वैध अधिकार के किसी की संपत्ति पर कब्जा जमाए बैठा है, तो संपत्ति के असली मालिक को उसका कब्जा वापस पाने का पूरा कानूनी अधिकार है।

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