Haryana News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा (Food Safety) विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उनके कानूनी अधिकारों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 अधिकारियों को केवल खाद्य पदार्थों की जांच का अधिकार देता है, न कि किसी व्यापारिक इकाई की मशीनरी को कब्जे में लेने का।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला कैथल स्थित एक व्यापारिक फर्म, एमएस सिंगला ट्रेडर्स से जुड़ा है। 14 नवंबर 2025 को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इस फर्म पर छापेमारी की थी और न केवल खाद्य पदार्थों के नमूने लिए, बल्कि वहां स्थापित प्लांट और मशीनरी को भी जब्त कर लिया था। विभाग की इस कार्रवाई को फर्म ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए गैर-कानूनी तरीके से मशीनों को जब्त किया है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने अपने फैसले में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु स्पष्ट किए—
अधिकार क्षेत्र की सीमा: कानून के अनुसार, फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) को केवल खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने, संदिग्ध खाद्य सामग्री को जब्त करने, परिसर की जांच करने और कानूनी अभियोजन (Prosecution) शुरू करने का अधिकार है।
मशीनरी जब्ती पर रोक: एक्ट में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि अधिकारी उत्पादन इकाई (Plant) या मशीनों को जब्त कर सकते हैं। ऐसी किसी भी कार्रवाई का अधिकार केवल सक्षम अदालत के पास है, वह भी कानून द्वारा निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद।
मौलिक अधिकार का हनन: हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि किसी व्यापारी की मशीनरी जब्त करना सीधे तौर पर उसके व्यापार करने के मौलिक अधिकार (Fundamental Right to Trade) का उल्लंघन है। संविधान के तहत संरक्षित इस अधिकार को किसी प्रशासनिक आदेश के जरिए मनमाने ढंग से नहीं छीना जा सकता।
परिसर सीलिंग बनाम मशीनरी जब्ती
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि नियमों के तहत अधिकारियों को कार्रवाई करने की शक्ति प्राप्त है। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। जस्टिस बंसल ने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में परिसर (Premises) को सील करने का प्रावधान तो हो सकता है, लेकिन मशीनरी की जब्ती पूरी तरह से कानून के दायरे से बाहर है।
व्यापारियों के लिए बड़ी राहत
अदालत के इस फैसले से उन खाद्य उत्पादकों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है, जो अक्सर निरीक्षण के दौरान अधिकारियों की मनमानी का शिकार होते हैं। हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासनिक अधिकारी कानून से ऊपर नहीं हैं और उन्हें अपनी शक्तियों का प्रयोग अधिनियम (Act) में दी गई सीमाओं के भीतर ही करना होगा।









