Haryana News: RTI में देरी को लेकर हरियाणा सूचना आयोग सख्त, अधिकारियों पर लगाया भारी जुर्माना

हरियाणा सूचना आयोग ने आरएस बाठ और गुरुग्राम के कादीपुर के तत्कालीन तहसीलदार सतीश कुमार पर RTI में देरी के मामले में कुल 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 1, 2026

Haryana News: हरियाणा राज्य सूचना आयोग (Haryana State Information Commission) ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत तय समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने में लंबी देरी और गंभीर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के तत्कालीन जन सूचना अधिकारी आरएस बाठ और गुरुग्राम के कादीपुर के तत्कालीन तहसीलदार सतीश कुमार पर कुल 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। दोनों दोषी अधिकारियों पर अलग-अलग मामलों में 25-25 हजार रुपये का जुर्माना ठोका गया है। यह अनुशासनात्मक कार्रवाई सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार शूरा के द्वारा की गई है।

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आरएस बाठ पर 25 हजार का जुर्माना

पहला मामला प्रार्थी भारत जैन द्वारा 4 जनवरी 2022 को दायर की गई आरटीआई अर्जी से संबंधित है। आवेदनकर्ता ने आरटीआई के तहत कुछ विशिष्ट जानकारियां मांगी थीं, लेकिन विभाग की ओर से तय समय सीमा में बिंदुवार और पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन जन सूचना अधिकारी आरएस बाठ कई बार आयोग के समक्ष पेश भी नहीं हुए, जिसे आयोग ने गंभीरता से लिया।

सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया गया था कि मांगी गई सूचना विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध है, जिस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल वेबसाइट का हवाला देकर नागरिकों को विशिष्ट और बिंदुवार जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। इस मामले में लापरवाही और आदेशों की अवहेलना के चलते अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही, संबंधित विभाग को यह भी सिफारिश भेजी गई है कि ऐसे अधिकारियों को आरटीआई नियमों का उचित प्रशिक्षण दिलाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी कोताही न हो।

दूसरा मामला: कादीपुर के तत्कालीन तहसीलदार पर भी लगा जुर्माना

दूसरा मामला हरिंदर ढींगरा की ओर से 7 नवंबर 2022 को दी गई आरटीआई अर्जी से जुड़ा है। गुरुग्राम के कादीपुर तहसील कार्यालय ने निर्धारित 30 दिनों के भीतर आवेदक को पूर्ण सूचना नहीं मुहैया कराई। इसके बाद 10 मई 2023 को जो जवाब दिया गया, वह भी पूरी तरह से अधूरा और भ्रामक था।

मामले में राज्य सूचना आयोग के कड़े हस्तक्षेप और लगातार सुनवाई के बाद आखिरकार 21 अगस्त 2026 को जाकर पूरी सूचना प्रार्थी को सौंपी जा सकी। आयोग ने अपनी जांच में पाया कि अधिकारी का यह दावा भी निराधार था कि मांगी गई सूचना पहले से वेबसाइट पर अपलोड है। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और जानबूझकर देरी करने के मामले में तत्कालीन तहसीलदार सतीश कुमार पर भी 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

भविष्य के लिए सख्त निर्देश और प्रशासनिक चेतावनी

सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार शूरा ने दोनों ही मामलों में कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि आरटीआई आवेदक को बाद में सूचना उपलब्ध भी करा दी जाती है, तो भी पहले की गई लंबी देरी और लापरवाही से अधिकारी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।

आयोग ने दोनों दोषी अधिकारियों के वेतन या निजी स्त्रोत से जुर्माना राशि वसूलने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे भविष्य में यह सुनिश्चित करें कि आरटीआई के तहत आने वाले सभी आवेदनों का निपटारा तय कानूनी समय सीमा के भीतर हो। यदि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ और भी कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।