Haryana News: हरियाणा ग्रुप-20 भर्ती को मिली कानूनी मंजूरी, चयनित उम्मीदवारों की नौकरी सुरक्षित

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) और ग्रुप-20 भर्ती से जुड़े हजारों युवाओं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 15, 2026

Haryana News: हरियाणा में सरकारी नौकरी कर रहे हजारों युवाओं के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की ग्रुप-20 भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह वैध मानते हुए इसके खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद ग्रुप-20 के तहत चयनित हो चुके सभी अभ्यर्थियों की नौकरियां अब पूरी तरह से सुरक्षित हो गई हैं और उनके सिर पर मंडरा रहा कानूनी संकट हमेशा के लिए खत्म हो गया है।

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

यह पूरा मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई विशेष अनुमति याचिका (SLP) से जुड़ा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए एस.एल.पी. (सी) नंबर 17373/2026 (सुभेंद्र एवं अन्य बनाम हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन व अन्य) को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह याचिका कुछ असंतुष्ट अभ्यर्थियों द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के 27 मार्च 2026 के समीक्षा निर्णय (Review Decision) को चुनौती देते हुए दायर की गई थी, जिसमें हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने या उसे निरस्त करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब हाई कोर्ट का पुराना फैसला पूरी तरह यथावत और प्रभावी बना रहेगा।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का क्या था मूल निर्णय?

इस कानूनी विवाद की जड़ें हाई कोर्ट के उस फैसले में हैं, जिसने पहले ही नियुक्त हो चुके कर्मचारियों के पक्ष में मजबूत दलील दी थी। 27 मार्च 2026 को अपने ऐतिहासिक निर्णय में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना था कि ग्रुप-20 सहित कुल 24 ऐसे ग्रुप हैं जिनकी पूरी भर्ती प्रक्रिया विधिक रूप से संपन्न हो चुकी थी।

हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

कर्मचारियों का पक्ष: चयनित अभ्यर्थी न केवल नियुक्त हो चुके हैं, बल्कि वे काफी समय से विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। ऐसे में उन्हें बिना पक्षकार बनाए या उनका पक्ष सुने बिना उनके चयन को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है।

मेरिट पर कोई असर नहीं: कोर्ट ने पाया कि सामाजिक-आर्थिक मानदंड (Socio-Economic Criteria) के अंकों का सी.ई.टी. (CET) के लिए अभ्यर्थियों को बुलाने की मुख्य मेरिट पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा था। इसलिए पूर्व में पूरी भर्ती प्रक्रिया और परिणामों को निरस्त करने का आदेश त्रुटिपूर्ण था।

भविष्य के लिए नियम: हाई कोर्ट ने साफ किया था कि भविष्य के लिए आयोग को दिए गए नए दिशा-निर्देश केवल आगे आने वाली भर्तियों पर लागू होंगे, जबकि पहले से नियुक्त कर्मचारी विधि के अनुसार अपनी सेवा में बने रहेंगे।

चेयरमैन हिम्मत सिंह का बयान: ‘यह न्याय और युवाओं की मेहनत की जीत है’

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के अध्यक्ष हिम्मत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने इस फैसले को ग्रुप-20 की भर्तियों से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के हित में एक बड़ा मील का पत्थर बताया।

चेयरमैन ने कहा कि यह फैसला केवल एक कानूनी जीत नहीं है, बल्कि यह न्याय, सत्य और संघर्ष के साथ-साथ प्रदेश के युवाओं की कड़ी मेहनत, धैर्य और उनके अटूट विश्वास की बड़ी जीत है। उन्होंने रेखांकित किया कि पूरे कानूनी विवाद के दौरान आयोग अपने अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती और मुस्तैदी के साथ खड़ा रहा। आयोग ने हर अदालती स्तर पर पुख्ता तथ्यों और स्थापित नियमों के आधार पर अपना पक्ष बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

अंत में, चेयरमैन हिम्मत सिंह ने ग्रुप-20 के सभी चयनित और कार्यरत अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक निर्णय भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, विधिक शुचिता तथा चयनित अभ्यर्थियों के अधिकारों पर जनता के विश्वास को और ज्यादा सुदृढ़ करता है।

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