Haryana News: रिश्वत के खिलाफ हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, ट्रैप में जब्त रकम होगी वापस

हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस ट्रैप कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब ट्रैप के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा अपनी जेब से दी गई रिश्वत की रकम उसे वापस लौटाई जाएगी।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 18, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय फैसला लिया है। अक्सर यह देखा जाता था कि विजिलेंस ट्रैप के दौरान नागरिकों द्वारा अपनी जेब से दी गई रिश्वत की राशि कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया लंबी होने के कारण वर्षों तक फंसी रहती थी, जिससे शिकायतकर्ताओं को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

अब आम नागरिकों को इस प्रकार की वित्तीय चिंताओं से मुक्त करने के लिए हरियाणा सरकार ने ‘हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो रिवॉल्विंग फंड’ का गठन किया है। इस क्रांतिकारी कदम से अब विजिलेंस कार्रवाई में सहयोग करने वाले लोगों को उनकी रिश्वत की रकम तुरंत वापस मिल सकेगी।

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क्या है हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो रिवॉल्विंग फंड?

हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। जारी नियमों के अनुसार, इस नए रिवॉल्विंग फंड का पूरा संचालन महानिदेशक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हरियाणा द्वारा किया जाएगा।

इस विशेष व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो नागरिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे आते हैं और विजिलेंस ट्रैप में अपनी राशि देकर सहयोग करते हैं, उन्हें आपराधिक मामले की जांच और लंबी अदालत की प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट या मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।

राशि की प्रतिपूर्ति के लिए तय की गई है पारदर्शी प्रक्रिया

सरकार ने इस फंड से शिकायतकर्ताओं को ट्रैप राशि की प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट) देने के लिए एक स्पष्ट और व्यवस्थित प्रक्रिया निर्धारित की है:

प्रस्ताव की शुरुआत: संबंधित जांच अधिकारी प्रतिपूर्ति का एक प्रस्ताव तैयार करेगा और उसे अपनी रेंज के प्रभारी के पास भेजेगा।

मुख्यालय तक पहुंच: यह प्रस्ताव पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) या संबंधित पुलिस अधीक्षक के माध्यम से विजिलेंस मुख्यालय तक पहुंचेगा।

विशेष समिति का गठन: मुख्यालय स्तर पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो मामले के सभी तथ्यों और गुणों-दोषों की समीक्षा करके प्रतिपूर्ति पर अंतिम निर्णय लेगी। इस समिति की अध्यक्षता राज्य सतर्कता एवं ब्यूरो के एडीजीपी या आईजी करेंगे, जबकि एक डीआईजी और जिला अटॉर्नी/उप जिला अटॉर्नी इसके सदस्य होंगे।

शपथ-पत्र जमा करने के बाद सीधे खाते में ट्रांसफर होगी राशि

प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने एक अनिवार्य शर्त भी रखी है। समिति से जैसे ही राशि की मंजूरी मिलेगी, शिकायतकर्ता को एक औपचारिक शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) देना होगा।

इस शपथ-पत्र में यह स्पष्ट करना होगा कि जब भी भविष्य में अदालत की कार्यवाही पूरी होने के बाद न्यायालय द्वारा ट्रैप की वह राशि रिलीज की जाएगी, तो उसे वापस लाकर इसी रिवॉल्विंग फंड में जमा करवा दिया जाएगा। जैसे ही यह अंडरटेकिंग विभाग को मिलेगी, स्वीकृत राशि सीधे शिकायतकर्ता के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी जाएगी।

फंड की निरंतरता और वित्तीय पारदर्शिता

इस रिवॉल्विंग फंड की निरंतरता बनाए रखने के लिए वित्तीय नियंत्रण के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सरकार के प्रावधान के मुताबिक, जैसे ही फंड की 70 प्रतिशत राशि का उपयोग हो जाएगा, उसमें तुरंत आवश्यक धनराशि फिर से उपलब्ध करा दी जाएगी ताकि भविष्य के ट्रैप अभियानों में किसी प्रकार की रुकावट न आए। इसके अलावा, इस पूरे फंड की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए इसका नियमित लेखा-परीक्षण (ऑडिट) प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा), हरियाणा द्वारा किया जाएगा।

सरकार के इस दूरदर्शी फैसले से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में आम नागरिकों का भरोसा और अधिक मजबूत होगा। अब लोग बिना किसी वित्तीय डर या संकोच के खुलकर विजिलेंस का साथ दे सकेंगे।

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