Haryana News: हरियाणा सरकार का निवेश बढ़ाने वाला कदम, ग्रीन हाइड्रोजन कंपनियों को मिलेगा बोनस इंसेंटिव

भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 16, 2026

Haryana News: भारत स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन का शुभारंभ करने जा रहे हैं। यह कदम न केवल भारतीय रेलवे के आधुनिकरण को दर्शाएगा, बल्कि देश में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित अर्थव्यवस्था (Green Hydrogen Economy) की नींव भी रखेगा। इस बड़े बदलाव के बीच हरियाणा राज्य नीतिगत सुधारों, भारी निवेश, अनुसंधान और विनिर्माण क्षमता के बल पर ग्रीन हाइड्रोजन का एक बड़ा औद्योगिक हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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मसौदा नीति में बड़ी तैयारी

हरियाणा सरकार ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ‘हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण’ (HAREDA) के माध्यम से एक समर्पित ग्रीन हाइड्रोजन नीति तैयार की है, जिसका मसौदा सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी कर दिया गया है। इस प्रस्तावित नीति के तहत वर्ष 2030 तक हरियाणा में प्रतिवर्ष 250 किलो टन (2.5 लाख टन) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही राज्य में 2 गीगावाट क्षमता के इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण का बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।

अनुमान है कि 2030 तक राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन की मांग बढ़कर 300 किलो टन प्रतिवर्ष हो जाएगी। सरकार इसके लिए वित्तीय सहायता, सब्सिडी और विभिन्न टैक्स प्रोत्साहनों के जरिए बड़े निवेशकों को आकर्षित कर रही है ताकि उद्योगों को डी-कार्बोनाइज (कार्बन मुक्त) किया जा सके।

‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026’ में मिला ‘थ्रस्ट’ दर्जा

राज्य सरकार की नई ‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026’ में ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए इसे ‘थ्रस्ट सेक्टर’ (Thrust Sector) में शामिल किया गया है। थ्रस्ट सेक्टर में वे उद्योग आते हैं जिनमें राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की असीम संभावनाएं होती हैं।

अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन

इस नीति के तहत जो भी कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण, फ्यूल सेल, हाइड्रोजन भंडारण या परिवहन उपकरणों के क्षेत्र में निवेश करेंगी, उन्हें पूंजीगत अनुदान (Capital Subsidy) पर अतिरिक्त 5 प्रतिशत टॉप-अप प्रोत्साहन (Incentive) दिया जाएगा। सरकार का यह कदम हरियाणा को उभरती हुई तकनीकों और भविष्य के उद्योगों का वैश्विक केंद्र बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

राष्ट्रीय मिशन को मिलेगी मजबूती

हरियाणा केवल कागजी नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू हो चुके हैं। पानीपत में एलएंडटी एनर्जी ग्रीनटेक द्वारा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की रिफाइनरी के लिए 10,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।

यह मेगा प्रोजेक्ट अगले 25 वर्षों तक पानीपत रिफाइनरी को स्वच्छ ईंधन की आपूर्ति करेगा, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और रिफाइनरी के कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट आएगी। इसे भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है, जो केंद्र सरकार के ‘राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ को सीधी मजबूती देगी।

उद्योगों को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रीन हाइड्रोजन के मामले में हरियाणा को अपनी भौगोलिक स्थिति का स्वाभाविक लाभ (Strategic Advantage) मिल रहा है। दिल्ली-एनसीआर से सटी सीमा, मजबूत सड़क व रेल नेटवर्क और पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार व यमुनानगर जैसे पहले से स्थापित औद्योगिक क्षेत्र राज्य के पक्ष में काम कर रहे हैं।

राज्य में मौजूद रिफाइनरी, ऑटोमोबाइल, स्टील, केमिकल और इंजीनियरिंग उद्योगों की भारी मौजूदगी के कारण यहां ग्रीन हाइड्रोजन की घरेलू मांग हमेशा बनी रहेगी। इससे न केवल मुख्य ऊर्जा संयंत्रों बल्कि लॉजिस्टिक्स, पाइपलाइन और उपकरण विनिर्माण से जुड़े सहायक उद्योगों (Ancillary Industries) का भी विकास होगा, जिससे आने वाले समय में राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।

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