Haryana News: सरकार का दालों पर बड़ा फोकस, 5 साल में उत्पादन बढ़ाने की बनेगी योजना

हरियाणा सरकार ने दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और नई योजनाओं का लाभ देने के लिए पांच वर्षीय रणनीति तैयार होगी। आखिर इस योजना से किसानों और कृषि क्षेत्र पर कितना असर पड़ेगा, सरकार का पूरा प्लान क्या है, जानिए विस्तृत रिपोर्ट में।

सरकार का दालों पर बड़ा फोकस

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 9, 2026

Haryana News: देश में दालों के उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लिया है। दाल उत्पादन मिशन को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक (डीजी एग्रीकल्चर) को राज्य का स्टेट मिशन डायरेक्टर (पल्सेज मिशन) नियुक्त किया गया है। इस नई जिम्मेदारी के तहत मिशन निदेशक दालों की खेती का क्षेत्र बढ़ाने, किसानों तक बेहतर गुणवत्ता वाले बीज पहुंचाने और उत्पादन क्षमता में सुधार लाने के लिए योजनाएं तैयार करेंगे।

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पांच वर्षों के लिए तैयार होगा सीड रोलिंग प्लान

सरकार की नई योजना के तहत दालों के बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पांच वर्षीय ‘सीड रोलिंग प्लान’ तैयार किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य किसानों को समय पर अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना है, ताकि बुवाई के समय किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस प्लान को जरूरत के अनुसार समय-समय पर अपडेट किया जाएगा, जिससे भविष्य में बीजों की कमी की समस्या को रोका जा सके। इसके साथ ही राज्य की जलवायु और मिट्टी के अनुसार बेहतर उत्पादन देने वाली दालों की किस्मों की पहचान भी की जाएगी।

हर साल बनेगी दाल उत्पादन की कार्ययोजना

नई व्यवस्था के अनुसार राज्य मिशन निदेशक हर वर्ष दालों के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्यों के अनुरूप होगी। योजना के लागू होने की नियमित निगरानी भी की जाएगी, ताकि तय उद्देश्यों को समय पर पूरा किया जा सके। केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान का सही और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना भी मिशन निदेशक की प्रमुख जिम्मेदारी होगी।

किसानों तक पहुंचेंगे गुणवत्तापूर्ण बीज और नई तकनीक

सरकार ने बीज उत्पादन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। इसके लिए अनुसंधान संस्थानों, सीड हब और प्रमाणित बीज उत्पादकों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा। बीज उत्पादन से लेकर वितरण तक की पूरी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘साथी पोर्टल’ पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इससे बीजों की उपलब्धता, वितरण प्रक्रिया और रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

किसानों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम

दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल बीज उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी देना भी योजना का अहम हिस्सा होगा। मिशन निदेशक किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान आयोजित करेंगे। इन कार्यक्रमों में किसानों को नई तकनीक, उन्नत बीज किस्मों और बेहतर कृषि तरीकों की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा हर वर्ष कम से कम एक राज्य स्तरीय दाल सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में विशेषज्ञ, किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल होंगे, जहां उत्पादन बढ़ाने के नए तरीकों और चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।

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आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मिलेगा समर्थन

सरकार का यह कदम आत्मनिर्भर भारत मिशन फॉर पल्सेज को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दालों के उत्पादन में बढ़ोतरी से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। नई व्यवस्था के माध्यम से सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को बेहतर संसाधन, आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराकर दाल उत्पादन को नई गति दी जाए। इसके अलावा केंद्र और राज्य स्तर की समितियों द्वारा दिए जाने वाले अन्य दायित्वों को भी मिशन निदेशक पूरा करेंगे।