Haryana News: हरियाणा के सिरसा जिले से किसानों के उग्र विरोध प्रदर्शन की एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिला मुख्यालय से सटे वैदवाला गांव में हाईटेंशन बिजली लाइनों के टावरों के लिए अधिग्रहित की गई भूमि का उचित मुआवजा न मिलने से नाराज आठ किसान जान की बाजी लगाकर ऊंचे टावरों पर चढ़ गए हैं। किसानों के इस कदम से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस बल और जिला प्रशासन के आला अधिकारी भारी अमले के साथ मौके पर पहुंच गए हैं और स्थिति को नियंत्रित करने के साथ-साथ किसानों को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास में जुटे हैं।
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सिरसा को ‘ब्लैक आउट’ से बचाने का था प्रोजेक्ट, 90% काम पूरा
दरअसल, सिरसा शहर को संभावित ‘ब्लैक आउट’ के खतरे से सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने पावर हाउस को एक नई वैकल्पिक बिजली लाइन से जोड़ने का फैसला किया था। सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू किया गया। वर्तमान व्यवस्था के मुताबिक, सिरसा के मुख्य पावर हाउस में पहले केवल एक ही लाइन से बिजली की आपूर्ति होती थी। ऐसे में अगर उस मुख्य लाइन में कोई तकनीकी खराबी या फॉल्ट आ जाता, तो पूरे शहर की बत्ती गुल हो जाती और ब्लैक आउट की स्थिति बन जाती।
इसी खतरे को टालने के लिए ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरने वाली एक नई मुख्य बिजली लाइन को पावर हाउस तक पहुंचाने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा भी हो चुका है। खेतों में बड़े-बड़े टावर खड़े कर दिए गए हैं और बिजली की तारें बिछाने का काम आखिरी दौर में है। यह लाइन वैदवाला समेत सिरसा के करीब आधा दर्जन गांवों से होकर गुजर रही है, लेकिन वैदवाला गांव में काम पहुंचते ही मुआवजे को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
23 जून से जारी था धरना, समाधान न होने पर टावर पर चढ़े किसान
वैदवाला गांव के किसान अपनी जमीन पर टावर लगाने और ऊपर से हाईटेंशन तारें गुजारने के एवज में अतिरिक्त मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार तयशुदा तय नियमों के आधार पर ही मुआवजा दे रही है। इसी के विरोध में ग्रामीण पिछले 23 जून से लगातार धरने पर बैठे थे। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसानों की कई दौर की बैठकें भी हुईं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
प्रशासनिक बेरुखी से नाराज होकर आज वैदवाला गांव के आठ किसान अचानक बिजली के हाईटेंशन टावर पर चढ़ गए और वहां चल रहे तारें बिछाने के काम को पूरी तरह रुकवा दिया। जैसे ही इसकी भनक बिजली निगम और पुलिस को लगी, अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों और विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। पिछले कई घंटों से ये आठों किसान टावर पर डटे हुए हैं और अपनी अधिग्रहित जमीन का कलेक्टर रेट से पांच गुना ज्यादा मुआवजा देने की जिद पर अड़े हैं।
‘वैदवाला के साथ हो रहा पक्षपात’, किसान नेताओं की दो टूक
टावर पर चढ़े किसान नेताओं भूपेन्द्र वैदवाला, मैक्स साहुवाला और हरजिन्द्र संधू ने टावर के ऊपर से ही साफ शब्दों में कहा कि जब तक सरकार और प्रशासन किसानों को उनकी जमीन का हक और उचित मुआवजा नहीं देता, तब तक उनका यह जानलेवा प्रदर्शन और धरना समाप्त नहीं होगा।
किसान नेताओं का सीधा आरोप है कि इस प्रोजेक्ट के तहत आने वाले वैदवाला के अलावा अन्य सभी गांवों में किसानों को कलेक्टर रेट से पांच गुना तक मुआवजा दिया जा रहा है। चूंकि वैदवाला गांव बिल्कुल सिरसा शहर से सटा हुआ है, इसलिए यहाँ की जमीनों की कीमत ज्यादा है, लेकिन प्रशासन यहाँ सबसे कम मुआवजा राशि दे रहा है। किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन लिखित में उचित मुआवजा देने पर सहमत हो जाते हैं, तो वे तुरंत टावर से नीचे उतर आएंगे और धरना समाप्त कर देंगे, अन्यथा आंदोलन और उग्र होगा।
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