Haryana News: हरियाणा शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, अधिकारियों और मंत्रियों की शक्तियां निर्धारित

Haryana Education Department News: हरियाणा सरकार ने शिक्षा विभाग में अधिकारों का स्पष्ट बंटवारा कर दिया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी और शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा की जिम्मेदारियां अलग-अलग तय की गई हैं। अब नियुक्तियों, तबादलों, नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक मामलों में किसका अंतिम अधिकार होगा, जानिए पूरी नई व्यवस्था।

हरियाणा शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 23, 2026

Haryana News: हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक कार्यों और फाइलों के निपटारे को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि किन मामलों में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी आवश्यक होगी, किन विषयों पर शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा अंतिम निर्णय लेंगे और कौन से मामलों का निपटारा विभागीय अधिकारी अपने स्तर पर कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाना, जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

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प्रधान सचिव ने जारी किए नए निर्देश

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की ओर से जारी आदेश में विभिन्न स्तरों पर अधिकारों का बंटवारा निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार यदि शिक्षा मंत्री किसी कारणवश चंडीगढ़ से बाहर हों और कोई मामला अत्यंत जरूरी हो, तो संबंधित प्रशासनिक सचिव उस मामले पर निर्णय ले सकते हैं।हालांकि ऐसे मामलों की पूरी जानकारी बाद में मंत्री को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

मुख्यमंत्री स्तर पर होंगे बड़े और नीतिगत फैसले

नई व्यवस्था के तहत विभाग से जुड़े सभी महत्वपूर्ण और नीतिगत मामलों पर अंतिम मंजूरी मुख्यमंत्री स्तर से ली जाएगी। इनमें विभागीय नीतियों में बदलाव, नए नियम बनाना या मौजूदा कानूनों में संशोधन जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा विधानसभा के तारांकित प्रश्नों और संसद में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नों के जवाब से जुड़े मामलों को भी मुख्यमंत्री के स्तर पर देखा जाएगा।

वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े फैसले CM करेंगे

समूह-ए (Group-A) अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, निलंबन, बर्खास्तगी और स्थानांतरण जैसे मामलों पर भी मुख्यमंत्री की मंजूरी आवश्यक होगी।इसी प्रकार विभाग के बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले और सेवा संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय भी मुख्यमंत्री स्तर पर तय किए जाएंगे।

स्कूल खोलने और बंद करने का अधिकार भी मुख्यमंत्री के पास

सरकारी स्कूलों, प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य शैक्षणिक इकाइयों को शुरू करने या बंद करने से जुड़े प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे जाएंगे। इसके अलावा निजी शिक्षण संस्थानों को सरकारी नियंत्रण में लेने, शिक्षा नीति से जुड़े बड़े बदलाव करने तथा विभाग की दीर्घकालिक योजनाओं पर अंतिम फैसला भी मुख्यमंत्री करेंगे।

शिक्षा मंत्री को दिए गए प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार

नई व्यवस्था के तहत शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा को कई प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। विधानसभा के अतारांकित प्रश्नों के जवाब, 10 लाख रुपये से अधिक की खरीद, बड़े विकास कार्यों की प्रशासनिक मंजूरी और भवन निर्माण परियोजनाओं से जुड़े मामलों का निपटारा मंत्री स्तर पर किया जाएगा।

कर्मचारियों से जुड़े कई फैसले मंत्री लेंगे

समूह-बी, समूह-सी और समूह-डी कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई और सेवा समाप्ति जैसे मामलों में निर्णय लेने की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को सौंपी गई है। इसके अलावा कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और विभागीय अनुशासन से जुड़े विषय भी मंत्री के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे।

निजी स्कूलों और अनुदान से जुड़े मामलों पर भी मंत्री का अधिकार

निजी स्कूलों को अनुदान देने, मान्यता संबंधी नियमों में विशेष छूट प्रदान करने और सरकारी स्कूलों को सहशिक्षा संस्थान घोषित करने जैसे मामलों में अंतिम निर्णय शिक्षा मंत्री करेंगे। साथ ही विभिन्न योजनाओं के बीच धनराशि के हस्तांतरण और शिक्षा परियोजनाओं से जुड़े कई प्रशासनिक फैसले भी मंत्री स्तर पर लिए जाएंगे।

प्रशासनिक कामकाज में आएगी तेजी

नई व्यवस्था से विभाग में निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। अधिकारों के स्पष्ट बंटवारे से फाइलों के लंबित रहने की संभावना कम होगी और विभिन्न स्तरों पर जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों का समय पर समाधान संभव हो सकेगा।

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