One Nation One Election: वन नेशन वन इलेक्शन पर रामदेव का बड़ा बयान, बोले- शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा फायदा

हरिद्वार में स्वामी रामदेव ने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ का समर्थन करते हुए कहा कि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों के समय का मुद्दा उठाया। रामदेव ने वंदे मातरम, लोकतांत्रिक विरोध और सामाजिक भेदभाव पर भी अपनी राय रखी।

One Nation One Election

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 23, 2026

One Nation One Election:  हरिद्वार की श्रीजी वाटिका में आयोजित ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ कार्यक्रम में योग गुरु स्वामी रामदेव ने एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार होने वाली चुनावी प्रक्रिया का असर विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ता है। अगर ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ लागू होता है तो शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

वन नेशन वन इलेक्शन से विकास कार्यों को मिलेगी गति

स्वामी रामदेव ने कहा कि देश में चुनावी गतिविधियां साल के कई महीनों तक चलती रहती हैं। चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी की बड़ी संख्या में तैनाती होती है, जिसका असर सामान्य सरकारी कामकाज पर भी पड़ता है। उनके मुताबिक, एक साथ चुनाव होने से बार-बार चुनावी तैयारियों में लगने वाला समय कम किया जा सकता है और विकास योजनाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा।

चुनावी ड्यूटी से शिक्षकों को मिले राहत, शिक्षा व्यवस्था होगी मजबूत

रामदेव ने चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों का काफी समय ड्यूटी में चला जाता है। यदि ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ लागू होता है तो शिक्षकों को बार-बार चुनावी जिम्मेदारियों में नहीं लगाया जाएगा और वे बच्चों की पढ़ाई पर अधिक समय दे सकेंगे। इससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

मतदाता केंद्र और राज्य में सरकार चुनने का फैसला खुद कर सकता है

योग गुरु ने कहा कि भारत का मतदाता बेहद समझदार है। उनका कहना था कि देश के नागरिक यह समझने में सक्षम हैं कि केंद्र और राज्य के लिए किसे चुनना है। इसलिए एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था को लेकर मतदाताओं की क्षमता पर सवाल उठाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का निर्णय सर्वोपरि है।

राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर होना चाहिए देशहित

स्वामी रामदेव ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के कारण देशहित से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी इच्छा है कि भारत 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए। रामदेव ने देश के विकास के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करने पर जोर दिया।

लोकतंत्र को हंगामे के जरिए बंधक बनाने पर रामदेव की आपत्ति

रामदेव ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और आंदोलनों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सड़क और संसद में हंगामा करके बंधक बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि अगर किसी नागरिक के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं।

आंदोलनों में नाबालिग बच्चों को आगे करने पर जताई चिंता

स्वामी रामदेव ने आंदोलनों में नाबालिग बच्चों की भागीदारी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों को राजनीतिक या सामाजिक आंदोलनों में आगे करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, विरोध दर्ज कराने के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और नाबालिगों को ऐसी गतिविधियों से दूर रखा जाना चाहिए।

कंगना रनौत के बयान पर टिप्पणी से स्वामी रामदेव ने किया इनकार

कार्यक्रम के दौरान जब स्वामी रामदेव से कंगना रनौत के एक बयान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह किसी ऐसी बात पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते, जिससे विवाद और ज्यादा बढ़े। रामदेव ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विवाद को हवा देना नहीं, बल्कि सकारात्मक और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर बात करना है।

वंदे मातरम को लेकर भी स्वामी रामदेव ने रखी अपनी बात

वंदे मातरम को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वामी रामदेव ने कहा कि इसे देवी-देवताओं या मंदिर की पूजा से जोड़कर विवाद खड़ा करने के बजाय इसके भाव और सांस्कृतिक संदर्भ को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके लिए भारत माता ही दुर्गा, लक्ष्मी और विद्या का स्वरूप हैं। उनके मुताबिक, भारत माता केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, कर्तव्य और जीवन मूल्यों का प्रतीक हैं।

वंदे मातरम राष्ट्रभक्ति और सम्मान की अभिव्यक्ति: रामदेव

स्वामी रामदेव ने कहा कि वंदे मातरम भारत माता के प्रति सम्मान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति है। उन्होंने इसके सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे केवल राजनीतिक विवाद के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, देश और समाज को जोड़ने वाले भावों को समझना जरूरी है।

जाति और वर्ग के आधार पर भेदभाव पर भी जताई चिंता

रामदेव ने समाज में जाति और वर्ग के नाम पर होने वाले भेदभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का उसकी जाति, सामाजिक वर्ग या पहचान के आधार पर अपमान नहीं होना चाहिए। उन्होंने एससी, एसटी, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, ब्राह्मण और संन्यासी समेत समाज के सभी वर्गों के सम्मान की बात कही। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और एक-दूसरे के प्रति सम्मान को जरूरी बताया।