Haryana News: हरियाणा के पानीपत जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने एक योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर बड़ौली गांव के पशु चिकित्सालय में तैनात एक पशु चिकित्सक (VLDA) को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब आरोपी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की एवज में अपनी जेबें भर रहा था। इस गिरफ्तारी से स्थानीय प्रशासन और भ्रष्ट कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है।
लोन पास कराने के नाम पर मांगी थी रिश्वत
मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी वीएलडीए (VLDA) अशोक कुमार बड़ौली गांव के पशु अस्पताल में कार्यरत था। भ्रष्टाचार का यह मामला तब सामने आया जब गांव के ही एक पशुपालक ने एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क किया। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे अपने पशुओं के लिए लोन की आवश्यकता थी, जिसे स्वीकृत करवाने के लिए आरोपी पशु चिकित्सक उससे 7,500 रुपये की रिश्वत मांग रहा था। शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था, जिसके बाद उसने हिम्मत दिखाते हुए पूरे मामले की सूचना एंटी करप्शन ब्यूरो को दी।
ACB का ‘जाल’ और रंगे हाथों गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। शिकायत की पुष्टि होने के बाद, ब्यूरो ने आरोपी को सबक सिखाने के लिए एक सुनियोजित जाल तैयार किया। तय योजना के अनुसार, शिकायतकर्ता को 5,000 रुपये की रिश्वत राशि के साथ आरोपी के पास भेजा गया।
जैसे ही शिकायतकर्ता ने बड़ौली स्थित अस्पताल में आरोपी को रिश्वत की रकम सौंपी, पास ही सादे कपड़ों में तैनात एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। आरोपी के पास से बरामद की गई नोटों की गड्डियों ने उसकी भ्रष्टाचार में लिप्त होने की पुष्टि कर दी। टीम ने फौरन मौके पर ही साक्ष्य जुटाए और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
भ्रष्टाचार पर लगाम
इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र के अन्य सरकारी कार्यालयों में भी खलबली मची हुई है। एसीबी के अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। किसी भी सरकारी कर्मचारी को जनता का शोषण करने और अनुचित लाभ लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि आम नागरिक जागरूक होकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं, तो भ्रष्ट तंत्र को नेस्तनाबूद किया जा सकता है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने पूर्व में कितने लोगों से और कितनी रिश्वत ली है।
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