Haryana News: राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर स्थित करनाल का बस्तारा (घरौंडा) टोल प्लाजा इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इसे पूरी तरह से बैरियर-मुक्त यानी ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) सिस्टम में तब्दील करने के बाद टोल की कार्यप्रणाली और स्थानीय निवासियों की सुविधा में बड़ा बदलाव आया है। इस तकनीकी अपग्रेडेशन ने न केवल यातायात को सुगम बनाया है, बल्कि स्थानीय वाहन चालकों के बीच ‘लोकल पास’ बनवाने की होड़ भी पैदा कर दी है।
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क्यों बढ़ी लोकल पास की मांग?
पहले बस्तारा टोल पर फिजिकल बूम बैरियर्स लगे होते थे, जहाँ स्थानीय निवासी या आसपास के गांवों के लोग अपना आईडी कार्ड दिखाकर या तो टोल मुक्त निकलते थे या रियायत प्राप्त कर लेते थे। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। NHAI ने बूम बैरियर्स को हटाकर वहां अत्याधुनिक ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे और RFID रीडर्स स्थापित कर दिए हैं।
इस हाई-टेक बदलाव का सीधा असर यह हुआ है कि अब कोई भी गाड़ी टोल से गुजरती है, तो कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर लेते हैं और फास्टैग (FASTag) से ऑटोमैटिक शुल्क कट जाता है। अब स्थानीय वाहन चालकों को भी सिंगल जर्नी के ₹185 या रिटर्न के ₹280 का भुगतान करना पड़ रहा है। अचानक होने वाली इस भारी कटौती से बचने के लिए स्थानीय लोगों ने अब धड़ाधड़ लोकल पास के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, जहां पहले रोजाना महज 70-80 लोकल पास की मांग आती थी, वह अब 200 से 250 के पार पहुंच गई है।
सरकार का ‘धांसू’ कदम
स्थानीय ग्रामीणों और दैनिक यात्रियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने एक राहतकारी पहल की है। टोल टैक्स के विरोध और रियायतों की मांग को लेकर हाल ही में केंद्रीय मंत्री और करनाल के सांसद मनोहर लाल खट्टर ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों से मुलाकात की थी। जनभावनाओं और स्थानीय हितों को ध्यान में रखते हुए, सरकार अब एक अत्यंत किफायती और सुविधाजनक ‘एनुअल पास’ (वार्षिक पास) योजना पर काम कर रही है।
वर्तमान में, टोल के 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्थानीय निवासियों के लिए मासिक पास की सुविधा ₹350 प्रति माह में उपलब्ध है। लेकिन, NHAI के प्रोजेक्ट हेड प्रदीप मलिक के अनुसार, सरकार अब इस व्यवस्था को और सुदृढ़ करते हुए ₹2,000 का वार्षिक पास लाने की तैयारी कर रही है। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि स्थानीय लोगों को हर महीने टोल ऑफिस के चक्कर लगाने या पास रिन्यू कराने के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। महज ₹2,000 के वार्षिक भुगतान पर वे पूरे एक साल तक इस टोल प्लाजा से बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बेरोकटोक आवाजाही कर सकेंगे।
यह नई नीति न केवल स्थानीय लोगों के आर्थिक बोझ को कम करेगी, बल्कि क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व सुव्यवस्थित बनाएगी। टोल प्रबंधन और सरकार का यह प्रयास तकनीकी विकास और मानवीय दृष्टिकोण के बीच एक बेहतरीन संतुलन का उदाहरण है, जिससे करनाल के निवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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